Sunday, August 16, 2026

परमाणु संयंत्रों के लिए नए नियमों का मसौदा जारी, बीमा से लेकर सिंगल लाइसेंस तक होंगे अहम प्रावधान.

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नई दिल्ली: भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नियामकीय व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने शांति अधिनियम, 2025 (SHANTI Act) से जुड़े मसौदा नियम जारी किए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में परमाणु संयंत्र संचालकों के लिए वित्तीय सुरक्षा, विदेशी तकनीक की मंजूरी और लाइसेंसिंग प्रक्रिया से जुड़े कई प्रावधान शामिल किए गए हैं।

ऑपरेटरों के लिए बीमा या वित्तीय सुरक्षा जरूरी

प्रस्तावित नियमों के तहत परमाणु संयंत्र संचालकों को बीमा पॉलिसी या अन्य निर्धारित वित्तीय सुरक्षा बनाए रखना अनिवार्य होगा। यह जिम्मेदारी उस समय तक बनी रहेगी, जब तक संबंधित स्टोरेज पूल से पूरा इस्तेमाल किया हुआ परमाणु ईंधन यानी स्पेंट फ्यूल हटा नहीं लिया जाता।

इस प्रावधान का उद्देश्य परमाणु नुकसान की स्थिति में संभावित नागरिक दायित्वों के लिए पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

हर पांच साल में होगी दायित्व सीमा की समीक्षा

मसौदा नियमों में परमाणु नुकसान के लिए ऑपरेटर की नागरिक जिम्मेदारी की अधिकतम सीमा की समय-समय पर समीक्षा का प्रावधान भी है। इसके लिए केंद्र सरकार हर पांच वर्ष में विशेषज्ञों की एक समिति गठित करेगी।

समिति मौजूदा परिस्थितियों और संबंधित कारकों का अध्ययन करने के बाद दायित्व सीमा में बदलाव की जरूरत पर अपनी सिफारिश दे सकती है।

विदेशी रिएक्टर तकनीक पर शर्तें

विदेशी डिजाइन पर आधारित परमाणु रिएक्टरों के लिए भी मसौदे में स्पष्ट शर्तें रखी गई हैं। ऐसी तकनीक को उसके मूल देश के नियामक प्राधिकरण से प्रमाणित या स्वीकृत होना जरूरी होगा।

इसके अलावा संबंधित तकनीक का मूल देश या किसी अन्य विदेशी देश में व्यावसायिक इस्तेमाल में होना भी आवश्यक शर्तों में शामिल है। मसौदे में मूल देश की परिभाषा भी ऐसे देशों के संदर्भ में की गई है, जिनके पास रिएक्टर डिजाइन और संबंधित सप्लाई चेन में पर्याप्त आत्मनिर्भरता तथा विश्वसनीय नियामकीय व्यवस्था हो।

साइट तय होने से पहले भी मिल सकती है सैद्धांतिक मंजूरी

प्रस्तावित लाइसेंसिंग व्यवस्था में कंपनियों के लिए कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को कुछ हद तक सरल बनाने का प्रावधान है। आवेदन स्वीकार होने के बाद लाइसेंसिंग अथॉरिटी परिस्थितियों के अनुसार इन-प्रिंसिपल अप्रूवल दे सकती है, भले ही उस चरण पर परियोजना की साइट या तकनीक अंतिम रूप से तय न हुई हो।

ऐसी मंजूरी मिलने के बाद संबंधित कंपनी रिएक्टर तकनीक के संभावित विक्रेताओं से बातचीत, जमीन से जुड़ी प्रक्रिया और आवश्यक बुनियादी ढांचे की तैयारी जैसे कदम उठा सकेगी।

निर्माण से लेकर डीकमीशनिंग तक एक लाइसेंस

मसौदा नियमों का एक प्रमुख प्रस्ताव सिंगल कंपोजिट लाइसेंस से जुड़ा है। इसके तहत परमाणु संयंत्र या रिएक्टर के निर्माण, स्वामित्व, संचालन और अंत में उसे बंद करने यानी डीकमीशनिंग के लिए एक समेकित लाइसेंस व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है।

इसका उद्देश्य अलग-अलग चरणों के लिए अलग लाइसेंस लेने की जरूरत को कम करना और परमाणु परियोजनाओं की नियामकीय प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

कुल मिलाकर, प्रस्तावित नियम परमाणु क्षेत्र में सुरक्षा और वित्तीय जिम्मेदारी को बनाए रखते हुए लाइसेंसिंग तथा परियोजना विकास की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने पर केंद्रित हैं।

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