Business News, 5 November 2026: धनतेरस और दिवाली पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। बदलते समय के साथ अब सोना खरीदने के लिए ज्वेलरी की दुकानों पर जाना जरूरी नहीं रह गया है। मोबाइल ऐप के जरिए भी 100, 500 या 5,000 रुपये जैसी छोटी रकम से सोना खरीदा जा सकता है। इसे डिजिटल गोल्ड कहा जाता है। हालांकि, ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा के साथ इसमें कुछ जोखिम और अतिरिक्त शुल्क भी जुड़े होते हैं। इसलिए खरीदने से पहले इसकी पूरी जानकारी लेना जरूरी है।
क्या होता है डिजिटल गोल्ड?
डिजिटल गोल्ड में ग्राहक मोबाइल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सोना खरीदता है। ग्राहक की ओर से खरीदी गई मात्रा के बराबर सोना प्लेटफॉर्म या उससे जुड़ी कंपनी सुरक्षित तिजोरी में रखने का दावा करती है। खरीदार अपने ऐप पर सोने की मात्रा और उसकी मौजूदा कीमत देख सकता है।
जरूरत पड़ने पर डिजिटल गोल्ड को ऑनलाइन बेचा जा सकता है। कुछ प्लेटफॉर्म सोने के सिक्के या बार के रूप में इसकी डिलीवरी लेने का विकल्प भी देते हैं। इस तरह ग्राहक को खुद सोना रखने या लॉकर की व्यवस्था करने की जरूरत नहीं पड़ती।
SEBI ने डिजिटल गोल्ड को लेकर क्यों दी चेतावनी?
डिजिटल गोल्ड की खरीदारी आसान जरूर है, लेकिन यह शेयर बाजार में कारोबार किए जाने वाले विनियमित गोल्ड निवेश उत्पादों जैसा नहीं है।
नवंबर 2025 में बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डिजिटल गोल्ड को लेकर निवेशकों को आगाह किया था। SEBI के अनुसार, डिजिटल गोल्ड उसके नियामकीय दायरे में नहीं आता। इसलिए इसमें शेयर बाजार से जुड़े विनियमित निवेश उत्पादों जैसी नियामकीय सुरक्षा उपलब्ध नहीं होती।
यदि डिजिटल गोल्ड उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म बंद हो जाए, कंपनी वित्तीय संकट में आ जाए या सोने के भंडारण और दावों को लेकर विवाद पैदा हो जाए, तो निवेशक के लिए अपना पैसा या सोना वापस हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
डिजिटल गोल्ड खरीदने पर कौन-कौन से चार्ज लग सकते हैं?
डिजिटल गोल्ड खरीदते समय केवल सोने की दिखाई गई कीमत को ही अंतिम लागत नहीं समझना चाहिए। अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर शुल्क की व्यवस्था अलग हो सकती है। खरीदारी से पहले इन संभावित खर्चों की जानकारी जरूर लें:
1. GST: डिजिटल गोल्ड खरीदने पर लागू GST अतिरिक्त लागत बढ़ा सकता है। भुगतान करने से पहले बिल में इसकी गणना देख लें।
2. खरीद और बिक्री की कीमत में अंतर: कई प्लेटफॉर्म सोना खरीदने और बेचने के लिए अलग-अलग कीमत दिखाते हैं। इस अंतर को बाय-सैल स्प्रेड कहा जाता है। इससे खरीदते ही बेचने पर मिलने वाली रकम कम हो सकती है।
3. मेकिंग और डिलीवरी चार्ज: यदि आप डिजिटल गोल्ड को सिक्के या बार के रूप में घर मंगवाना चाहते हैं, तो मेकिंग, पैकेजिंग और डिलीवरी शुल्क देना पड़ सकता है।
4. स्टोरेज या अन्य सेवा शुल्क: कुछ प्लेटफॉर्म निश्चित अवधि तक सोना मुफ्त रखने की सुविधा देते हैं, जबकि कुछ में निर्धारित अवधि के बाद भंडारण या अन्य सेवा शुल्क लागू हो सकते हैं। इसकी शर्तें पहले पढ़ लें।
खरीदने से पहले इन बातों की करें जांच
डिजिटल गोल्ड खरीदने से पहले प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता, सोने के भंडारण की व्यवस्था, बीमा, ऑडिट और निकासी से जुड़े नियम समझें। यह भी देखें कि सोने की डिलीवरी या ऑनलाइन बिक्री के लिए न्यूनतम कितनी मात्रा जरूरी है।
सिर्फ ऐप पर दिखाई देने वाली कीमत या आसान खरीदारी के आधार पर फैसला न लें। सभी शुल्क जोड़ने के बाद वास्तविक लागत और बिक्री के समय मिलने वाली रकम का अंतर समझना जरूरी है।
क्या धनतेरस पर डिजिटल गोल्ड खरीदना सही विकल्प है?
डिजिटल गोल्ड छोटी रकम से सोना खरीदने और उसे ऑनलाइन रखने की सुविधा देता है। लेकिन इसमें नियामकीय सुरक्षा की कमी और प्लेटफॉर्म से जुड़े जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसलिए धनतेरस पर डिजिटल गोल्ड खरीदने से पहले उसके नियम, शुल्क और जोखिमों की तुलना अन्य उपलब्ध सोना निवेश विकल्पों से करना उपयोगी होगा। किसी भी निवेश का फैसला अपनी जरूरत, जानकारी और जोखिम समझने के बाद ही लें।
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