Diwali Investment 2026: दिवाली और धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना भारतीय परिवारों की पुरानी परंपरा है। हालांकि, समय के साथ निवेश के विकल्प भी बदले हैं। अब लोग पारंपरिक आभूषणों के साथ गोल्ड ईटीएफ, सिल्वर ईटीएफ और म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय साधनों में भी रुचि ले रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि पिछले कुछ वर्षों में किस निवेश विकल्प ने कैसा प्रदर्शन किया और इस दिवाली पैसों की योजना बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पिछले पांच वर्षों के म्यूचुअल फंड निवेश आंकड़ों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। दूसरी ओर, मूल रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच और दस वर्षों में सोने-चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, पिछला रिटर्न भविष्य में मिलने वाले मुनाफे की गारंटी नहीं देता।
म्यूचुअल फंड निवेश में हर साल नहीं दिखी एक जैसी तेजी
प्राइम एमएफ डेटाबेस के हवाले से दी गई रिपोर्ट के अनुसार, दिवाली के आसपास म्यूचुअल फंड में निवेश का रुझान हर साल अलग रहा। कहीं बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई, तो कहीं निवेश में भारी गिरावट देखने को मिली।
पांच वर्षों में म्यूचुअल फंड निवेश का रुझान
- 2021: निवेश 5,866 करोड़ रुपये से बढ़कर 24,121 करोड़ रुपये पहुंच गया। रिपोर्ट में इसे 311 प्रतिशत की वृद्धि बताया गया है।
- 2022: निवेश 18,602 करोड़ रुपये से घटकर 6,318 करोड़ रुपये रह गया, जो रिपोर्ट के अनुसार 66 प्रतिशत की गिरावट थी।
- 2023: निवेश 16,916 करोड़ रुपये से बढ़कर 17,654 करोड़ रुपये हुआ। इसमें करीब 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
- 2024: निवेश 32,264 करोड़ रुपये से बढ़कर 90,152 करोड़ रुपये पहुंच गया। रिपोर्ट में इसे 179 प्रतिशत का उछाल बताया गया है।
- 2025: निवेश 46,442 करोड़ रुपये से घटकर 23,609 करोड़ रुपये रह गया। यह करीब 49 प्रतिशत की गिरावट थी।
ये आंकड़े बताते हैं कि दिवाली के महीने में म्यूचुअल फंड निवेश में हर साल एक जैसा रुझान नहीं रहा। हालांकि, निवेश के इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह समझना जरूरी है कि इनका आधार, संबंधित फंड श्रेणियां और समयावधि क्या है। केवल इन आंकड़ों से निवेशकों के वास्तविक रिटर्न का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेश का फैसला बाजार की स्थिति देखकर करें
प्राइम डेटाबेस ग्रुप के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया के अनुसार, खुदरा निवेशक केवल त्योहार होने के कारण म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में निवेश का फैसला नहीं करते। बाजार का स्तर और कंपनियों का मूल्यांकन भी उनके निर्णय को प्रभावित करता है।
बाजार में गिरावट आने पर कुछ निवेशकों को अच्छे मूल्यांकन पर निवेश का अवसर मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए कंपनियों की वित्तीय स्थिति, निवेश की अवधि और जोखिम को समझना जरूरी है। बाजार में गिरावट आने का मतलब यह नहीं है कि उसके बाद कीमतें निश्चित रूप से बढ़ेंगी।
दस वर्षों में सोने की कीमत में 376 प्रतिशत की बढ़ोतरी
मूल रिपोर्ट में दिए गए एमसीएक्स के आंकड़ों के मुताबिक, दिवाली 2016 में सोने की कीमत करीब 30,057 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। अक्टूबर 2026 तक यह बढ़कर लगभग 1,43,100 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है।
इस आधार पर सोने की कीमत में करीब 376 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में इसकी औसत सालाना वृद्धि लगभग 16.9 प्रतिशत बताई गई है।
हालांकि, यह कीमतों में हुई वृद्धि का आंकड़ा है। वास्तविक निवेश रिटर्न खरीद-बिक्री के भाव, शुल्क, कर और निवेश के तरीके के अनुसार अलग हो सकता है।
चांदी ने भी दिखाया मजबूत प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, दिवाली 2016 में चांदी की कीमत करीब 42,459 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अक्टूबर 2026 तक बढ़कर लगभग 1,96,350 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।
इस दौरान चांदी की कीमत में करीब 362 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में इसकी औसत सालाना वृद्धि लगभग 16.5 प्रतिशत बताई गई है।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों में भी सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी का उल्लेख है। दिवाली 2021 से अक्टूबर 2026 के बीच सोने में करीब 201 प्रतिशत और चांदी में करीब 206 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिवाली 2024 से दिवाली 2025 के बीच दोनों की कीमतों में लगभग 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि, इतनी तेज वृद्धि वाले किसी एक वर्ष को भविष्य के रिटर्न का सामान्य मानक नहीं मानना चाहिए।
सोने की मांग में निवेश का हिस्सा बढ़ने का दावा
रिपोर्ट में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि वर्ष 2025 में भारत में सोने की मांग मात्रा के लिहाज से 11 प्रतिशत घटकर 710.9 टन रह गई, जबकि उसकी कुल कीमत में 30 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 7.51 लाख करोड़ रुपये बताई गई।
रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान आभूषणों की मांग में गिरावट आई और कुल मांग में निवेश का हिस्सा 29 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गया।
इससे यह संकेत मिलता है कि सोने को केवल आभूषण के बजाय निवेश के विकल्प के रूप में देखने की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। हालांकि, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव, खरीद-बिक्री का अंतर और भंडारण जैसे पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
सिल्वर ईटीएफ में तेजी से बढ़ी निवेशकों की रुचि
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2022 में सिल्वर ईटीएफ की कुल संपत्ति लगभग 123 करोड़ रुपये थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 85,488 करोड़ रुपये हो गई।
सिल्वर ईटीएफ के जरिए निवेशक चांदी की कीमतों से जुड़े बाजार में निवेश कर सकते हैं, लेकिन इसमें भी कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम रहता है। निवेश से पहले संबंधित फंड के खर्च, जोखिम और निवेश की शर्तों को समझना जरूरी है।
दिवाली पर खर्च से पहले निवेश की योजना बनाएं
वैल्यू रिसर्च के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी धीरेंद्र कुमार ने सलाह दी है कि त्योहारों की खरीदारी के साथ दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए। उनकी सलाह का सार यह है कि पहले अपनी बचत और निवेश के लिए रकम निर्धारित करें, फिर उपलब्ध बजट के अनुसार खरीदारी करें।
त्योहार के दौरान खर्च करना स्वाभाविक है, लेकिन केवल दिखावे या खरीदारी के लिए पर्सनल लोन अथवा क्रेडिट कार्ड से महंगा कर्ज लेना घरेलू बजट पर दबाव डाल सकता है।
निवेश का फैसला करते समय इन बातों पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है:
- आपातकालीन बचत: निवेश से पहले जरूरी खर्चों और आपात स्थितियों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध रखें।
- निवेश की अवधि: अल्पकालिक जरूरतों का पैसा ऐसे निवेश में न लगाएं जिसमें कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव हो सकता है।
- जोखिम सहने की क्षमता: म्यूचुअल फंड, सोना और चांदी अलग-अलग तरह के जोखिम रखते हैं।
- विविधता: अपनी पूरी बचत किसी एक निवेश विकल्प में लगाने से बचें।
- कर्ज से सावधानी: त्योहार की खरीदारी के लिए ऐसा कर्ज न लें जिसकी किस्तें चुकाना मुश्किल हो सकता है।
सोना-चांदी या म्यूचुअल फंड, किसे चुनें?
किसी एक निवेश विकल्प को हर व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा नहीं कहा जा सकता। सोना और चांदी पोर्टफोलियो में विविधता देने में भूमिका निभा सकते हैं, जबकि म्यूचुअल फंड की विभिन्न श्रेणियां अलग-अलग वित्तीय लक्ष्यों के लिए उपयोगी हो सकती हैं। लेकिन सभी विकल्पों में जोखिम और संभावित रिटर्न अलग होते हैं।
दिवाली 2026 पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निवेश का चुनाव केवल पिछले वर्षों के रिटर्न या त्योहार की परंपरा के आधार पर न करें। अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि, जोखिम सहने की क्षमता और उपलब्ध बजट को ध्यान में रखकर फैसला लें। जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से मार्गदर्शन लेना भी उपयोगी हो सकता है।
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