Tuesday, September 15, 2026

दक्षिण भारत में रेल कनेक्टिविटी को बड़ा विस्तार, 10 हजार करोड़ से ज्यादा की 5 परियोजनाओं को मंजूरी.

Share

नई दिल्ली: दक्षिण भारत के कई प्रमुख रेल मार्गों पर आने वाले वर्षों में ट्रेनों की आवाजाही और कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में 10,021 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली पांच मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

रेल मंत्रालय के मुताबिक, इन योजनाओं के पूरा होने के बाद तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी। करीब 540 किलोमीटर रेल लाइन से जुड़े काम किए जाएंगे। परियोजनाओं को 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

किन रेल मार्गों पर होगा काम?

स्वीकृत परियोजनाओं के तहत अलग-अलग रेलखंडों पर नई लाइन, दोहरीकरण और मल्टी-ट्रैकिंग का काम किया जाएगा। प्रमुख परियोजनाएं इस प्रकार हैं:

  • अरक्कोनम-रेनिगुंटा: 77 किलोमीटर में तीसरी और चौथी रेल लाइन।
  • व्हाइटफील्ड-बांगरपेट: 47 किलोमीटर में तीसरी और चौथी लाइन।
  • होसुर-ओमालुर: 147 किलोमीटर रेलखंड का दोहरीकरण।
  • सलेम-करूर-डिंडीगुल: 159 किलोमीटर में रेल लाइन दोहरीकरण।
  • सिकंदराबाद (घटकेशर)-काजीपेट: 110 किलोमीटर में मल्टी-ट्रैकिंग का काम।

इन परियोजनाओं से बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद से जुड़े कई रेल कॉरिडोरों पर क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

2,121 गांवों और 52 लाख लोगों को फायदा

सरकार के अनुसार, परियोजनाओं के विस्तार से करीब 2,121 गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। इससे लगभग 52 लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचने का अनुमान है।

रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने से तिरुपति जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल के साथ-साथ होगेनक्कल फॉल्स, कोलार गोल्ड फील्ड्स, कोडाईकनाल हिल्स और यादगीरगुट्टा मंदिर जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान हो सकती है।

पीएम गति शक्ति के तहत तैयार हुई योजना

इन परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों को बेहतर तरीके से जोड़ना और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

रेल लाइन की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों के संचालन में सुविधा मिलने के साथ नेटवर्क की परिचालन क्षमता और भरोसेमंद सेवा में भी सुधार की उम्मीद है।

माल ढुलाई बढ़ेगी, पर्यावरण को भी लाभ

रेल मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं से कोयला, सीमेंट, लौह अयस्क, स्टील, खाद्यान्न और पेट्रोलियम उत्पादों जैसे जरूरी सामान की ढुलाई को बढ़ावा मिलेगा। रेलवे को हर साल करीब 47 मीट्रिक टन अतिरिक्त माल ढुलाई मिलने का अनुमान है।

परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी सरकार ने आंकड़े जारी किए हैं। इसके चलते करीब 8 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी और लगभग 42 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटने का अनुमान है। सरकार के मुताबिक, यह पर्यावरणीय लाभ करीब 2 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर माना जा रहा है।

Read more

Local News