Friday, October 23, 2026

तेज या टिमटिमाती रोशनी से सिरदर्द और चक्कर क्यों आते हैं? जानें किसे दौरे का ज्यादा जोखिम.

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हेल्थ डेस्क: स्मार्टफोन, टीवी, वीडियो गेम, सोशल मीडिया और अलग-अलग तरह की कृत्रिम रोशनी आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। आमतौर पर चमकती या टिमटिमाती रोशनी से अधिकांश लोगों को परेशानी नहीं होती, लेकिन कुछ लोगों में इसके कारण सिरदर्द, आंखों में असहजता, मितली या चक्कर जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

कुछ संवेदनशील लोगों में तेज फ्लैशिंग लाइट दौरे को ट्रिगर भी कर सकती है। हालांकि, रोशनी देखने के बाद सिरदर्द या चक्कर आना अपने आप में मिर्गी का संकेत नहीं माना जाता।

फोटोफोबिया क्या है?

तेज रोशनी के प्रति असहजता को फोटोफोबिया कहा जाता है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आशीष सुस्विरकर के मुताबिक, यह समस्या माइग्रेन से पीड़ित लोगों में काफी आम देखी जाती है।

तेज या लगातार बदलती रोशनी माइग्रेन के लक्षणों को बढ़ा सकती है। इसके साथ सिरदर्द के अलावा आंखों में परेशानी, जी मिचलाना और आवाज के प्रति संवेदनशीलता जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

इसलिए चमकती रोशनी के बाद असहज महसूस होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि व्यक्ति को मिर्गी है।

चमकती लाइट से चक्कर क्यों आ सकते हैं?

तेजी से बदलते विजुअल पैटर्न आंखों और दिमाग को मिलने वाली सूचनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ लोगों में इससे चक्कर, धुंधला दिखाई देना या बेचैनी महसूस हो सकती है।

माइग्रेन से पीड़ित लोगों या जिनका संतुलन तंत्र अधिक संवेदनशील है, उनमें ऐसी परेशानी होने की संभावना अधिक हो सकती है। कुछ स्थितियों में आंखों से मिलने वाली जानकारी और शरीर के बैलेंस सिस्टम के बीच तालमेल प्रभावित होने से भी चक्कर आ सकते हैं।

फोटोसेंसिटिव एपिलेप्सी क्या होती है?

फोटोसेंसिटिव एपिलेप्सी एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें कुछ खास तरह की चमकती या टिमटिमाती रोशनी संवेदनशील व्यक्ति में दौरे को ट्रिगर कर सकती है।

यह समस्या मिर्गी से पीड़ित लोगों के एक छोटे हिस्से में देखी जाती है। बच्चों और किशोरों में इसका महत्व अधिक हो सकता है, खासकर कुछ विशेष प्रकार की मिर्गी वाले लोगों में।

हर फ्लैशिंग लाइट समान जोखिम वाली नहीं

चमकती रोशनी से होने वाला प्रभाव कई बातों पर निर्भर करता है। इसमें रोशनी की चमक, टिमटिमाने की गति, रंग, कंट्रास्ट, आंखों के सामने उसका आकार, व्यक्ति से उसकी दूरी और एक्सपोजर की अवधि शामिल हैं।

कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, प्रति सेकंड करीब 5 से 30 बार चमकने वाली रोशनी संवेदनशील लोगों में प्रतिक्रिया पैदा करने की अधिक संभावना रख सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति की संवेदनशीलता अलग होती है।

किन लोगों को ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए?

जिन लोगों को पहले से मिर्गी है या जिन्हें अतीत में चमकती रोशनी के संपर्क में आने के बाद दौरा पड़ चुका है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बच्चों और किशोरों में कुछ खास प्रकार की मिर्गी होने पर भी चिकित्सकीय सलाह जरूरी हो सकती है।

नींद पूरी न होना, अत्यधिक थकान, बीमारी या मिर्गी की निर्धारित दवा न लेना जैसे कारक संवेदनशील व्यक्ति में दौरे के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

इन लक्षणों को हल्के में न लें

सिरदर्द, मितली, चक्कर या आंखों में परेशानी कई अलग-अलग कारणों से हो सकती है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति में बार-बार प्रतिक्रिया न देना, अचानक गिर जाना, शरीर में अनैच्छिक झटके, असामान्य आंखों की गतिविधि या घटना के बाद काफी देर तक भ्रम जैसी स्थिति दिखाई दे, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

ऐसे लक्षणों को केवल स्क्रीन या तेज रोशनी का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

जांच के दौरान EEG की मदद

यदि डॉक्टर को मिर्गी की आशंका होती है, तो EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम) जांच की जा सकती है। कुछ मामलों में EEG के दौरान नियंत्रित तरीके से फ्लैशिंग लाइट का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे फोटिक स्टिमुलेशन कहा जाता है।

EEG की रिपोर्ट को डॉक्टर मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जांचों के साथ मिलाकर समझते हैं। केवल किसी एक टेस्ट के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता।

स्क्रीन इस्तेमाल करते समय ये सावधानियां मददगार

  • स्क्रीन की ब्राइटनेस और कंट्रास्ट को जरूरत के मुताबिक रखें।
  • बहुत अंधेरे कमरे में तेज स्क्रीन का इस्तेमाल करने से बचें।
  • लगातार लंबे समय तक फ्लैशिंग या तेजी से बदलते विजुअल वाले वीडियो न देखें।
  • स्क्रीन इस्तेमाल करते समय बीच-बीच में ब्रेक लें।
  • अचानक तेज चमकती रोशनी सामने आने पर उससे नजर हटा लें।
  • यदि आपको पहले ऐसी रोशनी से परेशानी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लें।

कब तुरंत चिकित्सा सहायता जरूरी है?

यदि किसी व्यक्ति को दौरा पांच मिनट से अधिक समय तक रहता है, लगातार दोबारा दौरे आते हैं, गंभीर चोट लगती है या सांस लेने में परेशानी होती है, तो तत्काल आपात चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

क्या सामान्य स्क्रीन से मिर्गी हो जाती है?

सामान्य तौर पर स्मार्टफोन या कंप्यूटर स्क्रीन का इस्तेमाल अपने आप मिर्गी पैदा नहीं करता। हालांकि, जिन लोगों में पहले से फोटोसेंसिटिविटी है, उनके लिए कुछ खास तरह के फ्लैशिंग पैटर्न समस्या पैदा कर सकते हैं।

निष्कर्ष: चमकती रोशनी और मिर्गी के बीच संबंध मौजूद है, लेकिन यह स्थिति अपेक्षाकृत कम लोगों में देखने को मिलती है। वहीं, माइग्रेन या अन्य संवेदनशीलता वाले लोगों में तेज रोशनी सिरदर्द, मितली या चक्कर जैसी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए लक्षणों को समझना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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