रामगढ़: जिले की चुटूपालू घाटी में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और जान-माल के नुकसान को देखते हुए जिला प्रशासन गंभीर है. शुक्रवार को डीसी ऋतुराज और एसपी मुकेश कुमार लुणायत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के साथ करीब छह किलोमीटर लंबी घाटी क्षेत्र का निरीक्षण किया. इस दौरान दुर्घटना संभावित (ब्लैक स्पॉट) स्थलों का जायजा लिया गया और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की गई.
- निरीक्षण के दौरान डीसी और एसपी ने घाटी से गुजरने वाले ट्रक चालकों, अन्य वाहन चालकों, स्थानीय लोगों और रामगढ़ पुलिस से लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारणों की विस्तार से जानकारी ली. अधिकारियों ने यह समझने का प्रयास किया कि आखिर किन वजहों से इस मार्ग पर बार-बार सड़क हादसे हो रहे हैं और किन बिंदुओं पर तत्काल सुधार की आवश्यकता है.
- आपको बता दें कि एनएच 33 रांची-पटना मुख्य मार्ग चुटूपालू घाटी में लगातार हो रही दुर्घटनाओं से न केवल लोगों की जान जा रही है, बल्कि करोड़ों रुपये की संपत्ति का भी नुकसान हो रहा है. आए दिन ट्रकों के पलटने, वाहनों के टकराने और घंटों तक जाम लगने से आम लोगों के साथ-साथ परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हो रहा है.
- निरीक्षण के दौरान डीसी और एसपी ने सड़क किनारे क्षतिग्रस्त गार्डवाल, सुरक्षा बैरियर, संकेतक बोर्ड, ढलान वाले हिस्से और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का भी बारीकी से निरीक्षण किया. इस दौरान डीसी ने कई स्थानों पर सुरक्षा इंतजामों में कमी पर नाराजगी जताते हुए NHAI अधिकारियों को आवश्यक सुधार कार्य तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया.
- रामगढ़ के एसपी मुकेश कुमार लुणायत ने निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि पूरी घाटी क्षेत्र का निरीक्षण किया जा रहा है. जिसमें NHAI के अधिकारी और सड़क सुरक्षा समिति के सदस्यों के साथ पूरी घाटी क्षेत्र में ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित स्थानों का जायजा लिया गया. दुर्घटनाओं को कैसे कम किया जा सकता है उसके लिए शॉर्ट टर्म उपाय और लॉन्ग टर्म उपाय दोनों की चर्चा की गई. आने वाले समय में घाटी क्षेत्र में दुर्घटना ना हो इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा ठोस उपाय किए जाएंगे.

- डीसी ऋतुराज ने इस दौरान NHAI के अधिकारी को तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. रामगढ़ डीसी ने बताया कि चुटूपालू घाटी में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की टेक्निकल टीम को बुलाया गया है. टीम द्वारा निर्माणाधीन सड़क पर प्रत्येक 100 मीटर पर तकनीकी निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन कारणों से दिक्कतें आ रही हैं और तकनीकी दृष्टिकोण से उनमें क्या-क्या सुधार संभव है.
- डीसी ऋतुराज ने निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीच में कहा कि एनएचएआई को दो से तीन दिनों का समय दिया गया है. इस अवधि में पूरी घाटी का विस्तृत सर्वे कर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों तरह के सुधारात्मक उपायों की अलग-अलग रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी. प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि तत्काल किए जा सकने वाले उपायों के साथ-साथ भविष्य के स्थायी समाधान भी रिपोर्ट में शामिल किए जाएं
- उन्होंने कहा कि टेक्निकल टीम ने प्रारंभिक निरीक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. इनमें घाटी के विभिन्न स्थानों पर पहले से चिन्हित स्केप (एस्केप) लेन के निर्माण को प्राथमिकता देने की बात शामिल है, जिस पर अब ठोस पहल की जाएगी. इसके अलावा घाटी के दोनों ओर नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी और वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए जिला प्रशासन लगातार अभियान चलाएगा.
- दीर्घकालिक समाधान के तहत सड़क के किनारे आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है, ताकि भविष्य में एक वैकल्पिक (अल्टरनेट) मार्ग विकसित किया जा सके. उन्होंने कहा कि शॉर्ट टर्म उपायों में दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सभी आवश्यक कदम तेजी से उठाए जाएंगे. वहीं लॉन्ग टर्म की योजनाओं को भी जल्द धरातल पर उतारने की दिशा में तेज गति से कार्य किया जाएगा. रिपोर्ट में दुर्घटनाओं के वास्तविक कारण, चिन्हित ब्लैक स्पॉट, उन्हें दुरुस्त करने की कार्ययोजना और भविष्य में हादसों की रोकथाम के लिए उठाए जाने वाले ठोस कदम शामिल करने को कहा गया है.

चुटूपालू घाटी लंबे समय से सड़क हादसों के लिए बदनाम रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत और मांग के बावजूद सड़क सुरक्षा के स्थायी उपाय एनएचएआई की ओर से नहीं किए गए, जिसके कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही है. अब जिला प्रशासन के सख्त रुख के बाद उम्मीद जगी है कि NHAI इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सुधार करेगा, ताकि इस घाटी में लगातार हो रहे हादसों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.


