Friday, July 3, 2026

ट्रंप टैरिफ के बाद अमेरिका में मखाना महंगा हो जाएगा.

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दरभंगा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 अगस्त से भारत के उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया है. जिस वजह से अमेरिका में मखानो की कीमत में बढ़ोतर गी. वहीं इस वजह से बिहार के सैकड़ों किसान और निर्यातक भी इससे प्रभावित होंगे. ‘ट्रंप टैरिफ’ के कारण मखाना उत्पादों की मांग पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. इससे बचने के लिए व्यापारी अब नए बाजार की ओर रुख करने को मजबूर हो रहे हैं.

मखाने का सबसे अधिक अमेरिका में निर्यात: देश के कुल मखाना उत्पादन का 80% से अधिक बिहार में होता है. स्थानीय खपत के बाद जो मखाना निर्यात होता है, उसमें से 20-25 प्रतिशत हिस्सा अकेले अमेरिका में निर्यात किया जाता है. पूरे बिहार से लगभग दस टन प्रति दिन भेजा जा रहा है. ऐसे में ट्रंप टैरिफ लागू होने से इसकी कीमत बढ़ेगी, जिससे अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा.

ट्रंप टैरिफ से मखाना निर्यात पर असर?: दरभंगा के मखाना निर्यातक भानु सरावगी कहते हैं कि अर्थव्यवस्था यही कहती है कि जब कीमत बढ़ती है तो उसकी डिमांड कम हो जाती है. इससे दो तरह से प्रभाव पड़ेगा. खुदरा बाजार से जो उपभोक्ता खरीदते हैं, उनको ज्यादा कीमत देना होगा. वहीं दूसरा असर ये होगा कि जो एक बड़ा मखाना का अमेरिका का मार्केट था, वहां ज्यादा से ज्यादा मखाना जाता था. अब कम हो जाएगा. हालांकि भानु सरावगी ये भी कहते हैं कि अचानक से 50% टैरिफ लगा दिया गया है. ऐसे में हो सकता है कि 2-3 महीने के बाद बाद अचानक फिर से दाम घटा दे.

“अमेरिका एक्सपोर्ट का शेयर देखेंगे तो बिहार से प्रतिदिन 10 टन मखाना यहां से निर्यात किए जाते हैं, जिसमें अनुमानित 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका भेजा जाता है. मेरा मानना है टैरिफ लगने से सीधा प्रभाव खुदरा मार्केट और ग्राहक पर पड़ेगा.”- भानु सरावगी, मखाना निर्यातक, दरभंगा

नए बाजार की तलाश जरूरी: वहीं, सी फूड मखाना के निर्यातक शिशिर सुमन कहते हैं कि बिहार से सालाना 600 टन मखाना अमेरिका निर्यात होता है. टैरिफ बढ़ने से उसके ऑर्डर में गिरावट आ सकती है. भारतीय सामान अमेरिका में महंगे हो जाएंगे. ऐसे में हमें मखाने के निर्यात के लिए अमेरिका का विकल्प खोजना होगा. नया बाजार में मिलने से असर नहीं पड़ेगा लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता है, तबतक निर्यात प्रभावित होगा.

“उत्पादन पहले से ही मांग के मुकाबले कम है. अगर अमेरिका से ऑर्डर घटते हैं तो हम दूसरे देशों की ओर रुख करेंगे. इसके लिए नए बाजार ढूंढने होंगे, जोकि आसान नहीं है.”- शिशिर सुमन, सी फूड मखाना के निर्यातक

क्या कहते हैं अर्थशास्त्री?: वहीं अर्थशास्त्री विद्याथी विकास कहते हैं कि जब अमेरिकी टैरिफ से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है तो भला बिहार का मखाना कैसे अछूता रह सकता है. इसके असर को कम करने के लिए केंद्र सरकार को चाहिए कि 86 बिलियन डॉलर निर्यात के लिए अलग-अलग देशों से व्यापार को बढ़ावा दे, ताकि ट्रंप टैरिफ के इफेक्ट को कम किया जा सके.

“अतिरिक्त टैरिफ लगाने से अमेरिकी बाजार में हमारी वस्तुएं महंगी होगी तो मांग भी काम होगी. जिस वजह से हमें डॉलर कम मिलेगा. इसका असर निर्यात पर भी पड़ेगा.अगर हम व्यापकता में देखें तो टैरिफ बढ़ने से बिहार के निर्यात पर भी असर पड़ने वाला है. ऐसे में इससे बचने के लिए हमें नया बाजार तो ढूंढना ही पड़ेगा.”- डॉ. विद्यार्थी विकास, अर्थशास्त्री

कहां-कहां होता है मखाना का उत्पादन?: वैसे तो बिहार के लगभग आधे जिलों में मखाना का उत्पादन होता है लेकिन मिथिलांचल, कोसी और सीमांचल में यह बड़े पैमाने पर होता है. मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल, खगड़िया, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार समेत 16 जिलों के किसान मखाने की खेती करते हैं. 25,000 से अधिक किसान इससे जुड़े हुए ह

क्या है ट्रंप का टैरिफ?: 27 अगस्त से उन तमाम प्रोडक्ट पर अमेरिका में 50 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है, जो भारत से भेजा जाता है. इससे अमेरिका में बिकने वाले सी फूड, कपड़े और जेम्स-ज्वेलरी जैसे भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे. इस वजह से डिमांड में 70 फीसदी तक कमी आ सकती है.

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