Saturday, August 8, 2026

झारखंड हाईकोर्ट की पहल: बच्चों की कस्टडी और पैरेंटल एक्सेस मामलों में फिलहाल लागू होगी अंतरिम गाइडलाइन.

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रांची: बच्चों की कस्टडी, माता-पिता से मुलाकात के अधिकार और Parenting Plan से जुड़े मामलों में झारखंड हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि जब तक राज्य में इस विषय पर स्थायी नियम तैयार नहीं होते, तब तक कलकत्ता हाईकोर्ट की संबंधित गाइडलाइन को मार्गदर्शक के तौर पर अपनाया जाएगा।

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान से शुरू हुई जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। कोर्ट ने इस विषय पर स्थायी व्यवस्था तैयार करने की जिम्मेदारी हाईकोर्ट की रूल्स कमेटी को दी है।

जिला अदालतों और फैमिली कोर्ट तक पहुंचेगी गाइडलाइन

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि अंतरिम गाइडलाइन को राज्य के सभी जिला जजों, फैमिली कोर्ट, मजिस्ट्रेट और ऐसे अन्य न्यायालयों तक पहुंचाया जाए, जहां पारिवारिक विवाद, वैवाहिक मामले या बच्चों की कस्टडी से जुड़े प्रकरणों की सुनवाई होती है।

निर्देश के अनुसार गाइडलाइन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायाधीशों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को इसकी कम से कम एक हार्ड कॉपी भी दी जाएगी।

स्थायी नियम बनने तक रहेगी अंतरिम व्यवस्था

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि झारखंड हाईकोर्ट में फिलहाल Child Custody, Child Access और Parenting Plan को लेकर अलग से कोई विस्तृत नियम नहीं हैं। ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने के मद्देनजर विषय को रूल्स कमेटी के समक्ष भेजा गया है।

रूल्स कमेटी की सिफारिश और बाद में फुल कोर्ट की मंजूरी के बाद स्थायी नियम तैयार किए जाएंगे। तब तक कलकत्ता हाईकोर्ट की गाइडलाइन को अंतरिम आधार पर इस्तेमाल किया जाएगा।

दूसरे हाईकोर्ट की व्यवस्थाओं का भी उल्लेख

सुनवाई के दौरान कर्नाटक, केरल और दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से बच्चों की कस्टडी और माता-पिता के मुलाकात संबंधी मामलों में जारी किए गए दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख हुआ। झारखंड हाईकोर्ट ने इन न्यायालयों की पहल को भी ध्यान में रखा।

अदालतों के न्यायिक विवेक पर नहीं लगेगी पाबंदी

हाईकोर्ट ने साफ किया कि यह गाइडलाइन अनिवार्य नियम के रूप में न्यायिक विवेक को सीमित नहीं करेगी। संबंधित अदालतें प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अपने न्यायिक अधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगी।

गाइडलाइन का उद्देश्य केवल ऐसे मामलों की सुनवाई के दौरान अदालतों को एक संदर्भ और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।

घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में भी प्रासंगिक

अदालत ने कहा कि जहां बच्चों की कस्टडी या पारिवारिक विवाद के साथ वैवाहिक विवाद अथवा Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 से जुड़े प्रावधान लागू होते हैं, वहां भी इस अंतरिम व्यवस्था को ध्यान में रखा जा सकता है।

हाईकोर्ट के अनुसार यह व्यवस्था स्थायी नियम बनने तक प्रभावी रहेगी। निर्देश जारी करने के बाद अदालत ने स्वत: संज्ञान से शुरू की गई जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया।

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