Thursday, October 22, 2026

झारखंड में 2000 करोड़ की ग्रामीण सड़क योजनाओं पर ब्रेक, मिट्टी-मोरम चालान के विवाद से बढ़ी परेशानी.

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रांची, 22 अक्टूबर 2026: झारखंड में ग्रामीण सड़कों के निर्माण से जुड़ी करीब 2,000 करोड़ रुपये की योजनाओं पर संकट गहराता नजर आ रहा है। मानसून के दौरान बारिश के कारण पहले ही निर्माण कार्य प्रभावित हुआ था। अब मिट्टी और मोरम के चालान से जुड़ी प्रक्रियागत अड़चन के कारण ठेकेदारों के भुगतान में परेशानी आने की बात सामने आई है। इससे राज्य के विभिन्न इलाकों में चल रही सड़क परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका है।

मिट्टी-मोरम के चालान को लेकर क्या है विवाद?

सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी और मोरम के लिए वैध चालान उपलब्ध कराने की अनिवार्यता को लेकर ठेकेदारों और संबंधित विभागों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। जानकारी के मुताबिक, खान विभाग के नियमों के तहत चालान के सत्यापन के बाद ही निर्माण एजेंसियों के बिलों का भुगतान किया जाना है।

वहीं, ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में मिट्टी और मोरम के चालान तैयार करने की स्पष्ट सुविधा नहीं होने के कारण जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। इस स्थिति में उनके भुगतान अटकने की समस्या सामने आई है।

भुगतान रुका तो निर्माण कार्य भी हुआ प्रभावित

भुगतान में देरी से सड़क निर्माण एजेंसियों के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। निर्माण कार्यों में लगी मशीनों, मजदूरों और अन्य संसाधनों का खर्च लगातार जारी रहता है। ऐसे में बिलों का भुगतान नहीं होने पर परियोजनाओं को आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, कई जगहों पर ठेकेदारों ने काम धीमा कर दिया है या निर्माण स्थल से मशीनें और श्रमिक हटा लिए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

हालांकि, राज्य में प्रभावित परियोजनाओं की वास्तविक संख्या और कितने कार्य पूरी तरह बंद हैं, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

सरकार कैबिनेट के जरिए समाधान निकालने की तैयारी में

इस समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार की ओर से खान विभाग के नियमों और चालान से जुड़ी प्रक्रिया में बदलाव पर विचार किए जाने की जानकारी है। प्रस्ताव को आगामी कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए पेश किए जाने की बात कही गई है।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई मिट्टी या मोरम की निर्धारित राशि का दोगुना संबंधित विभाग ठेकेदार के बिल से काटकर खान विभाग के खाते में जमा कर सकता है। इससे चालान से जुड़ी मौजूदा अड़चन दूर करने और भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कैबिनेट की मंजूरी और संबंधित विभागों के आधिकारिक आदेश जरूरी होंगे। फिलहाल इसे प्रस्तावित समाधान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

ग्रामीण सड़कों के निर्माण पर क्या होगा असर?

ग्रामीण सड़कों का निर्माण गांवों को बाजार, स्कूल, अस्पताल और दूसरी जरूरी सेवाओं से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। यदि भुगतान और चालान से जुड़ी समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो परियोजनाओं को पूरा करने में देरी हो सकती है।

अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि प्रक्रिया में संशोधन को मंजूरी मिलती है और भुगतान की बाधा दूर होती है, तो प्रभावित सड़क योजनाओं पर काम दोबारा गति पकड़ सकता है।

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