Ranchi News, 4 November 2026: झारखंड सरकार द्वारा सरकारी निर्माण कार्यों में लघु खनिजों के इस्तेमाल पर वैध चालान अनिवार्य करने और नियमों का पालन नहीं होने पर कड़ी आर्थिक कार्रवाई के फैसले से ठेकेदारों में नाराजगी है। राज्य के ठेकेदार संगठनों ने इसके विरोध में आंदोलन करने का निर्णय लिया है।
आंदोलन के पहले चरण में ठेकेदार राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपेंगे। इसके बाद ज्ञापन पर होने वाली कार्रवाई और उसके परिणाम के आधार पर आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।
महालेखाकार की रिपोर्ट के बाद बदले गए नियम
सरकारी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले लघु खनिजों से मिलने वाली रॉयल्टी के ऑडिट के दौरान महालेखाकार ने पाया कि बिना वैध चालान के इस्तेमाल किए गए खनिजों का हिस्सा अधिक है। रिपोर्ट में इस व्यवस्था के कारण अवैध खनन बढ़ने की आशंका भी जताई गई।
इसके बाद सरकार ने खान एवं खनिज विभाग के माध्यम से लघु खनिज समानुदान नियमावली में संशोधन किया और ठेकेदारों पर दंड लगाने का प्रावधान लागू किया।
27 अप्रैल 2026 से पहले की व्यवस्था क्या थी?
वर्ष 2017 में नियमावली में संशोधन कर सरकारी निर्माण कार्यों में लघु खनिजों के इस्तेमाल के लिए वैध चालान जमा करना अनिवार्य किया गया था। हालांकि, ठेकेदारों को यह विकल्प भी दिया गया था कि यदि वे वैध चालान उपलब्ध नहीं करा पाते हैं, तो संबंधित खनिजों पर सामान्य रॉयल्टी की दो गुना राशि जमा कर सकते हैं।
इस भुगतान के बाद ठेकेदारों का बिल जारी कर दिया जाता था। यही व्यवस्था 27 अप्रैल 2026 से पहले तक लागू थी।
नए नियम से निर्माण कार्य प्रभावित होने का दावा
सरकार ने 27 अप्रैल 2026 को अधिसूचना जारी कर बिना वैध चालान वाले लघु खनिजों के इस्तेमाल पर ठेकेदारों का भुगतान रोकने का आदेश दिया था। इसके बाद राज्य में चल रहे निर्माण कार्य प्रभावित होने लगे।
ठेकेदार संगठनों ने सरकार को ज्ञापन सौंपकर पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की थी। उनका कहना है कि नए प्रावधानों के कारण निर्माण कार्यों में मुश्किलें बढ़ी हैं।
अब रॉयल्टी के साथ खनिज मूल्य का दो गुना वसूली का प्रावधान
नियमों में किए गए नए संशोधन के तहत 27 अप्रैल 2026 से पहले इस्तेमाल किए गए बिना चालान वाले लघु खनिजों के मामले में दो गुना रॉयल्टी के बकाये का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।
वहीं, 27 अप्रैल 2026 के बाद बिना चालान खनिजों का इस्तेमाल करने पर सामान्य रॉयल्टी के साथ खनिजों के मूल्य का दो गुना जुर्माना वसूलने का फैसला किया गया है। इसके अलावा मिट्टी के अवैध खनन और परिवहन जैसे मामलों में रॉयल्टी का 10 गुना दंड लगाने का प्रावधान लागू किया गया है।
सरकार के इन प्रावधानों से ठेकेदारों में असंतोष बढ़ गया है। इसी के विरोध में संगठनों ने पहले सभी जिलों में ज्ञापन सौंपने और फिर आगे की रणनीति तय करने का फैसला किया है। BHARATSUPERFASTNEWS
