Ranchi News | 2 नवंबर 2026: झारखंड में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बच्चों से जुड़ा शिशु पंजी अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने इसके तहत राज्यभर में हैबिटेशन मैपिंग अभियान चलाने की तैयारी की है। अभियान को 10 नवंबर 2026 से पहले पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
3 से 18 साल तक के बच्चों की जुटाई जाएगी जानकारी
इस अभियान के तहत गांवों, टोलों और विभिन्न बसावटों में घर-घर जाकर 3 से 18 वर्ष तक के बच्चों का सर्वे किया जाएगा। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि कितने बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, कितने अब तक नामांकित नहीं हुए हैं और कितने ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है।
सर्वे से शिक्षा से वंचित बच्चों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इसके आधार पर उन्हें दोबारा विद्यालय से जोड़ने और नामांकन सुनिश्चित करने की योजना बनाई जाएगी।
शिक्षकों को सौंपी जाएगी सर्वे की जिम्मेदारी
हैबिटेशन मैपिंग के तहत प्रखंड स्तर पर गांवों और टोलों को सरकारी विद्यालयों से जोड़ा जाएगा। इसके बाद संबंधित स्कूलों के शिक्षकों को उनके निर्धारित क्षेत्रों में सर्वे करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
प्रधानाध्यापक शिक्षकों के बीच गांवों, टोलों और परिवारों का कार्यक्षेत्र तय करेंगे। क्षेत्र का बंटवारा करते समय स्कूल में शिक्षकों की उपलब्धता, बस्ती से विद्यालय की दूरी, परिवारों की संख्या और काम के संतुलित वितरण जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।
होटल, ढाबे और कार्यस्थल भी सर्वे में होंगे शामिल
इस अभियान का दायरा केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा। गैर-सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसके अलावा गांवों और टोलों में स्थित होटल, ढाबे, दुकान तथा अन्य कार्यस्थलों पर काम करने वाले परिवारों के बच्चों की जानकारी भी जुटाई जाएगी।
सर्वेक्षण में विद्यालयों की माता समिति और सरस्वती वाहिनी के सदस्य भी सहयोग करेंगे। उनकी मदद से शिक्षक परिवारों तक पहुंचेंगे और बच्चों से संबंधित विवरण एकत्र करेंगे।
कोई घर सर्वे से नहीं छूटे, इस पर रहेगा जोर
अभियान के दौरान यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि प्रत्येक परिवार तक सर्वे टीम पहुंचे। साथ ही एक ही परिवार का दोबारा सर्वे होने से बचाने के लिए भी व्यवस्था की जाएगी।
JEPC का लक्ष्य सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ऐसे बच्चों की पहचान करना है, जो किसी वजह से शिक्षा से दूर हैं। इसके बाद उन्हें स्कूलों से जोड़ने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे, ताकि राज्य में 3 से 18 वर्ष तक के बच्चों की शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
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