Sunday, May 3, 2026

जयप्रकाश विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों में अब प्रतिदिन ऑनलाइन पठन-पाठन की रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी, राज्यपाल सचिवालय सीधे इसकी निगरानी करेगा।

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जयप्रकाश विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों में अब प्रतिदिन ऑनलाइन पठन-पाठन की रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। राज्यपाल सचिवालय सीधे इसकी निगरानी करेगा। शिक्षकों द्वारा पढ़ाई गई सामग्री, प्राध्यापकों के नाम और पाठ्यक्रम की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। यह व्यवस्था छात्रों की कम उपस्थिति और सेमेस्टर सिस्टम के दबाव के कारण लाई गई है, ताकि शैक्षणिक सत्र नियमित हो सके और पारदर्शिता बढ़े।

छपरा। जयप्रकाश विश्वविद्यालय तथा इसके अंतर्गत आने वाले छपरा, सिवान और गोपालगंज जिले के सभी अंगीभूत एवं संबद्ध कालेजों में अब पठन-पाठन की प्रतिदिन ऑनलाइन रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। कक्षाओं में शिक्षकों द्वारा क्या पढ़ाया गया, इसकी जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। इस व्यवस्था के जरिए राज्यपाल सचिवालय सीधे पठन-पाठन की निगरानी करेगा।

इस संबंध में राज्यपाल सचिवालय की ओर से जेपी विश्वविद्यालय सहित राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को पत्र भेजा गया है। प्रधान सचिव डॉ. राबर्ट एल चांग्धू ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया है कि वेबसाइट को अपडेट कर 15 दिनों के भीतर इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू किया जाए। साथ ही आदेश के अनुपालन की जानकारी लोक भवन को उपलब्ध करानी होगी।

तीन बिंदुओं पर देनी होगी जानकारी

निर्देश के अनुसार विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर कुल तीन प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी अपलोड करनी होगी। इसमें संकायवार प्रतिदिन संचालित कक्षाओं का विवरण, संबंधित विषय पढ़ाने वाले प्राध्यापकों के नाम और पाठ्यक्रम की जानकारी शामिल होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस दिन किस विषय की कक्षा चली और उसमें क्या पढ़ाया गया।

कम होती उपस्थिति बनी चिंता का कारण

राज्यपाल सचिवालय का मानना है कि कालेजों की कक्षाओं से धीरे-धीरे छात्र-छात्राएं गायब हो जाते हैं। नामांकन के बाद जब स्नातक और पीजी कोर्स के प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू होती हैं, तब शुरुआती दिनों में उपस्थिति अच्छी रहती है। लेकिन कुछ समय बाद स्थिति बदल जाती है।

कई विषयों में 350 से अधिक नामांकन होने के बावजूद कक्षाओं में केवल एक दर्जन या उससे भी कम छात्र उपस्थित रहते हैं। कम उपस्थिति के कारण कई कॉलेजों में शिक्षक भी नियमित रूप से कक्षाएं संचालित नहीं कर पाते। इस व्यवस्था से कक्षा संचालन में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया गया है।

सेमेस्टर सिस्टम से बढ़ा दबाव

सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के बाद स्नातक कोर्स में हर छह महीने में परीक्षा अनिवार्य है। साथ ही इंटरनल परीक्षा, अगले सेमेस्टर का नामांकन, फार्म भरने और अन्य प्रशासनिक कार्यों में काफी समय चला जाता है। ऐसे में नियमित पढ़ाई के लिए सीमित समय ही बच पाता है।

सत्र नियमित करने के उद्देश्य से कभी तीन महीने तो कभी उससे भी कम अवधि में सेमेस्टर परीक्षाएं आयोजित कर दी जाती हैं। इसका सीधा असर कक्षा संचालन पर पड़ता है।

परीक्षा कैलेंडर भी होगा ऑनलाइन

विश्वविद्यालयों को अपनी वेबसाइट पर स्नातक से लेकर पीजी तक की सभी आगामी परीक्षाओं का कैलेंडर भी अपलोड करना होगा। इससे छात्र-छात्राओं को यह जानकारी मिलेगी कि कौन-सी परीक्षा कब शुरू होगी और कब समाप्त होगी। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र पटरी पर है या नहीं।

कोरोना काल की व्यवस्था की याद

कोरोना काल में विश्वविद्यालय और कालेजों की ओर से वेबसाइट पर पढ़ाई से जुड़े कंटेंट अपलोड किए गए थे। इसमें ऑनलाइन कक्षाओं के लिंक, विषयवार सामग्री, महत्वपूर्ण प्रश्न और वीडियो लेक्चर शामिल थे। उस समय दूरदराज के छात्रों के लिए यही पढ़ाई का प्रमुख माध्यम बना था। अब उसी तर्ज पर पठन-पाठन की निगरानी को फिर से सशक्त किया जा रहा है।

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