नई दिल्ली: त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में अचानक तेजी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। हालांकि, उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि फिलहाल देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और घबराकर अतिरिक्त खरीदारी करने की जरूरत नहीं है।
आयात से बाजार को मिल सकता है सहारा
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार, शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी देने का सरकार का फैसला बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। उनका कहना है कि इससे त्योहारी अवधि में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता कम होगी।
उन्होंने दावा किया कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए मिलों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। साथ ही, आगामी गन्ना पेराई सीजन सामान्य समय से करीब 10-15 दिन पहले शुरू होने की संभावना है। इससे नई चीनी की उपलब्धता भी अपेक्षाकृत जल्दी हो सकती है।
उद्योग प्रतिनिधि के मुताबिक, हालिया तेजी का एक कारण त्योहारी मांग के साथ बाजार में सट्टेबाजी और अतिरिक्त खरीदारी भी हो सकती है। उनका मानना है कि आयात और जल्द शुरू होने वाली पेराई से आने वाले समय में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
खुदरा कीमत में एक महीने में बड़ा बदलाव
उपभोक्ता मामलों के विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन के आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव 17 अगस्त को 51.68 रुपये प्रति किलो था, जो 22 अगस्त को बढ़कर 60.26 रुपये प्रति किलो हो गया।
एक महीने पहले 22 जुलाई को यही औसत कीमत 48.52 रुपये प्रति किलो थी। पिछले वर्ष 22 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा भाव 46.25 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया था।
AISTA ने भी अतिरिक्त खरीदारी से बचने की सलाह दी
ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) के चेयरमैन प्रफुल विठलानी ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को अपनी नियमित जरूरत से अधिक चीनी खरीदने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति और अक्टूबर में बनने वाली चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की सुविधा से आपूर्ति की स्थिति बेहतर हो सकती है।
विठलानी का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में अतिरिक्त आयात की तत्काल आवश्यकता नहीं दिखती। उन्होंने उपभोक्ताओं से बाजार में घबराहट पैदा करने वाली खरीदारी से बचने की अपील की।
पिछले वर्षों में चीनी निर्यात का उतार-चढ़ाव
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के चीनी निर्यात में पिछले एक दशक में काफी बदलाव आया है।
| सीजन | चीनी निर्यात |
|---|---|
| 2015-16 | 0 एलएमटी |
| 2016-17 | 0.47 एलएमटी |
| 2017-18 | 6.2 एलएमटी |
| 2018-19 | 38 एलएमटी |
| 2019-20 | 60 एलएमटी |
| 2020-21 | 70 एलएमटी |
| 2021-22 | 110 एलएमटी |
| 2022-23 | 63 एलएमटी |
| 2023-24 | 1 एलएमटी |
| 2024-25 | 9 एलएमटी |
एलएमटी = लाख मीट्रिक टन
आंकड़ों से पता चलता है कि चीनी निर्यात 2021-22 में 110 एलएमटी के स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद इसमें उल्लेखनीय गिरावट आई और 2023-24 में यह सिर्फ 1 एलएमटी रह गया। 2024-25 में निर्यात बढ़कर 9 एलएमटी हुआ।
आने वाले दिनों में कीमतों पर नजर
उद्योग जगत को उम्मीद है कि आयात की अनुमति, घरेलू स्टॉक और समय से पहले शुरू होने वाली गन्ना पेराई से बाजार में चीनी की उपलब्धता मजबूत होगी। इससे कीमतों में स्थिरता आने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल विशेषज्ञों की सलाह है कि उपभोक्ता अपनी सामान्य जरूरत के मुताबिक ही चीनी खरीदें और कीमत बढ़ने की आशंका में जरूरत से ज्यादा स्टॉक न करें।
