Monday, May 4, 2026

खसरा (मीजल्स) और रूबेला के कारण मार्च से अबतक बांग्लादेश में खसरे से 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, ऐसे में जानिए…

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बांग्लादेश में खसरा और रूबेला के बढ़ते मामलों के बीच, मेघालय सरकार ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है, विशेष रूप से पश्चिम जयंतिया हिल्स में. 118 से अधिक मौतों और हजारों संदिग्ध मामलों के बाद, सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी कड़ी कर दी गई है, और स्थानीय निवासियों से बुखार और चकत्ते जैसे लक्षणों की सूचना देने का आग्रह किया गया है.

असल में, 19 अप्रैल 2026 तक बांग्लादेश में खसरे के 3,443 से ज्यादा कन्फर्म केस और 23,600 सस्पेक्टेड केस रिपोर्ट किए गए हैं. बांग्लादेश में, 19 लाख से ज्यादा बच्चों को खसरा-रूबेला का टीका लगाया जा चुका है. मेघालय में भी सीमावर्ती गांवों में वैक्सीनेशन पर जोर दिया जा रहा है. इसके साथ ही मेघालय के वेस्ट जैंतिया हिल्स जिला एडमिनिस्ट्रेशन ने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के साथ मिलकर अप्रैल 2026 में खास मॉनिटरिंग और तैयारी मीटिंग की हैं. इन मीटिंग का मुख्य मकसद क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन के खतरे को रोकना और पड़ोसी देश बांग्लादेश में मीजल्स-रूबेला के मामलों में बढ़ोतरी के बाद सतर्कता बढ़ाना है.

हेल्थ अधिकारियों ने बच्चों के लिए MR वैक्सीन की डोज समय पर देने और बॉर्डर इलाकों में निगरानी बढ़ाने की अपील की है. हालांकि मेघालय में अभी तक कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं. ऐसे में आज इस खबर में जानिए क्या होता है खसरा और रूबेला? यह रोग कितना गंभीर है और इसके क्या लक्षण होते हैं…

क्या है मीजल्स या खसरा
खसरा एक इंफेक्शन है जो पैरामिक्सो फैमिली के वायरस से होता है. यह इंफेक्शन किसी इंफेक्टेड इंसान के खांसने, छींकने, छूने और खाने से फैलता है. यह वायरस इंसान के गले और नाक में पाया जाता है और जब यह किसी बच्चे या बड़े को इंफेक्ट करता है, तो यह सांस की नली, फेफड़ों और स्किन के साथ-साथ शरीर के दूसरे हिस्सों को भी इंफेक्ट करता है. अगर यह इंफेक्शन किसी प्रेग्नेंट महिला को होता है, तो यह बढ़ते हुए बच्चे के लिए जानलेवा हो सकता है. इस इंफेक्शन का खतरा ज्यादातर कुपोषित बच्चों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में होता है. इसके अलावा, ऐसे बच्चे और प्रेग्नेंट महिलाएं, जिन्हें खसरे का टीका नहीं लगा है, वे भी दूसरों की तुलना में इस इंफेक्शन के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होते हैं. साल 1963 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के डेटा के मुताबिक, खसरे की वैक्सीन मार्केट में आने से पहले, लगभग हर दूसरे से तीसरे साल खसरे की महामारी फैलती थी. नतीजतन, हर साल लगभग 2.6 मिलियन बच्चे और बड़े मौत का शिकार होते थे.

खसरे के लक्षण
खतरे के लक्षण आमतौर पर किसी इन्फेक्टेड व्यक्ति के संपर्क में आने के लगभग 7 से 14 दिनों के अंदर दिखने लगते हैं. जो समय पर ध्यान न देने से और भी खराब हो सकते हैं. सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, खसरे के कुछ लक्षण इस प्रकार हैं…

  • पहले लक्षण इन्फेक्शन के 7 से 14 दिन बाद दिखते हैं जिसमें…
  • तेज बुखार, जो 104 डिग्री से ज्यादा हो सकता है
  • खांसी
  • नाक बहना (कोरिजा)
  • कंजंक्टिवाइटिस जैसे लक्षण यानी आंखें लाल होना और लगातार पानी आना
  • लक्षण दिखने के दो से तीन दिन बाद कोप्लिक स्पॉट दिखने लगते हैं
  • इस स्थिति में, मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे बनने लगते हैं

खसरे के लक्षण दिखने के 3 से 5 दिन बाद चपटे दाने दिखते हैं
खसरे के लक्षण दिखने के करीब 3 से 5 दिन बाद शरीर पर चपटे दाने दिखने लगते हैं, जो मुंह और गर्दन के ऊपरी हिस्से से शुरू होकर शरीर के निचले हिस्सों तक फैल जाते हैं. धीरे-धीरे इन चकत्तों में हल्की सूजन आ सकती है और कुछ समय बाद ये चकत्ते इतनी तेजी से फैलने लगते हैं. पास-पास उभरे दो चकते मिलकर एक हो जाते हैं और पूरे शरीर की त्वचा पर नजर आने लगते हैं. इस कंडीशन में व्यक्ति को तेज बुखार होता है, जो कभी-कभी 104 डिग्री से भी ज्यादा हो सकता है.

खसरे से इन्फेक्टेड व्यक्ति या बच्चे की हेल्थ पर भी कई गंभीर असर हो सकते हैं, जिनमें से कुछ इस तरह हैं…

  • कानों का इन्फेक्शन
  • डायरिया और शरीर में पानी की कमी
  • निमोनिया और ब्रोंकाइटिस
  • एन्सेफेलाइटिस
  • प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली दिक्कतें
  • कंजंक्टिवाइटिस या आंखों का इन्फेक्शन
  • अंधापन

खसरे का वैक्सीनेशन
नेशनल हेल्थ पोर्टल ऑफ इंडिया (NHP) के मुताबिक, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की सलाह है कि खसरे से बचाव के लिए सभी बच्चों को दो बार वैक्सीन लगनी चाहिए. यह वैक्सीन MR (मीजल्स रूबेला) और MMR (मीजल्स मम्स रूबेला) का कॉम्बिनेशन होता है. खसरे का पहला वैक्सीन 9 से 12 महीने के बच्चों को और दूसरा वैक्सीन 16 से 24 महीने की उम्र के बच्चों को लगाया जाता है. अगर किसी वजह से बच्चे को एक तय उम्र में वैक्सीन नहीं लग पाती है, तो उसे बाद में लगवाना चाहिए.

मीजल्स, जिसे भारत में आमतौर पर खसरा के नाम से जाना जाता है, एक जानलेवा फैलने वाली बीमारी है जिससे हर साल दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के डेटा के मुताबिक, मीजल्स के लिए सुरक्षित और सस्ती वैक्सीन मौजूद होने के बावजूद, साल 2018 में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 1,40,000 से ज्यादा थी. इनमें से ज्यादातर 5 साल से कम उम्र के बच्चे थे.

हालांकि, आंकड़ों के मुताबिक, मीजल्स (खसरा) वैक्सीनेशन से दुनिया भर में इस बीमारी से होने वाली मौतों में काफी कमी आई है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की नवंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2000 से 2024 के बीच मीजल्स से होने वाली मौतों में 88 फीसदी की कमी आई है, जिससे करीब 59 मिलियन (5.9 करोड़) जानें बची हैं. हालांकि, वैक्सीनेशन की कमी के कारण 2024 में मामले फिर से बढ़ गए हैं

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