Friday, April 17, 2026

केंद्र सरकार ने 2020 में मर्चेंट डिस्काउंट रेट हटा दिया है, जिससे यूपीआई पेमेंट्स पर कोई फीस नहीं लगती है.

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नई दिल्ली: डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम पहल UPI को 10 साल पूरे होने वाले हैं. आज भारत और कई अन्य देशों में करोड़ों लोग पेमेंट के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. फिलहाल यूजर्स से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है. यही वजह है कि लोग छोटे से छोटे भुगतान के लिए यूपीआई का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि ट्रांजैक्शन फीस लगाने से अधिकांश लोग इसे छोड़ देंगे.

लोकलसर्कल्स (LocalCircles) के एक सर्वे से पता चलता है कि अगर ट्रांजैक्शन फीस लगाई जाती है, तो 75% यूजर यूपीआई के जरिये पेमेंट करना बंद कर देंगे, जबकि सिर्फ 25% ही पेमेंट करने को तैयार हैं.

सर्वे के मुताबिक, 57% यूज़र ने कहा कि पिछले साल उन्हें कम से कम एक बार ऐसा हुआ है जब किसी मर्चेंट (दुकानदार) ने UPI से पैसा लेने से मना कर दिया और कैश मांगा.

फिलहाल UPI ट्रांजैक्शन पर यूजर्स या मर्चेंट्स के लिए कोई चार्ज नहीं लगता है, क्योंकि सरकार ने 2020 में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) हटा दिया है, जिससे ऐसे पेमेंट्स पर कोई फीस नहीं लगती है. इससे पहले, व्यापारी आम तौर पर बैंकों और पेमेंट प्रोसेसर को हर ट्रांजैक्शन पर लगभग 0.2–0.3% की छोटी सी फीस देते थे. उस फीस से पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को फंड किया जाता था.

MDR हटाने से रेवेन्यू लाइन खत्म हो गई है, लेकिन लागत खत्म नहीं हुई है. बैंक और पेमेंट ऐप्स पर अभी भी प्रोसेसिंग कॉस्ट लगती है. सरकार एक इंसेंटिव स्कीम के जरिये इकोसिस्टम को मुआवजा देती है.

इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, UPI अब हर साल 240 बिलियन से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है. उस स्तर पर, हर ट्रांजैक्शन के कुछ पैसे भी पूरे सिस्टम में बड़ी लागत में बदल जाते हैं. जिससे बैंकों और पेमेंट ऐप्स की लागत बढ़ती है और हर ट्रांजैक्शन से रेवेन्यू जीरो रहता है. बैंक इंफ्रास्ट्रक्चर और सेटलमेंट कॉस्ट उठाते हैं, जबकि पेमेंट ऐप्स टेक्नोलॉजी, कस्टमर एक्विजिशन और सपोर्ट पर खर्च करते हैं.

लागत वसूलने के दूसरे तरीके
यूपीआई पर डायरेक्ट चार्ज खत्म होने के बाद, बैंक और पेमेंट ऐप्स दूसरे तरीके से लागत वसूलने की कोशिश कर रहे हैं. UPI पर क्रेडिट कार्ड लिंक करना और छोटे लोन देना. इंश्योरेंस, इन्वेस्टमेंट और लेंडिंग प्रोडक्ट की सेलिंग करना आदि.

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