Saturday, June 20, 2026

कम बारिश और एल नीनो से 2026 में आर्थिक जोखिम का खतरा है, जबकि शेयर बाजार में 13.1 करोड़ युवा निवेशक शामिल हुए हैं.

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नई दिल्ली: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में वर्ष 2026 के लिए भारत के आर्थिक परिदृश्य को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार काफी हद तक मानसून के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी. मौसम विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के अनुमान को घटाकर लंबी अवधि के औसत का 90 फीसदी कर दिया है, जो अब तक के सबसे कम अनुमानों में से एक है.

इस साल अल नीनो (El Nino) के उभरते खतरे के कारण देश में सूखे जैसी स्थिति पैदा होने की 60 प्रतिशत आशंका है. रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि कम बारिश का सबसे ज्यादा असर उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण प्रायद्वीप पर पड़ेगा. इतिहास गवाह है कि जब भी अल नीनो सक्रिय हुआ है, तब खरीफ फसलों की बुवाई, जलाशयों के जलस्तर और रबी फसलों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है, जिससे खाद्य महंगाई बढ़ने का सीधा खतरा बना रहता है.

शेयर बाजार में युवाओं और महिलाओं का दबदबा
एक तरफ जहां मानसून अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय शेयर बाजार के जनसांख्यिकीय (Demography) ढांचे में एक सकारात्मक और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है. एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, देश में रजिस्टर्ड निवेशकों की कुल संख्या मई 2026 तक बढ़कर 13.1 करोड़ के पार पहुंच गई है. पिछले केवल सात महीनों में ही एक करोड़ नए निवेशक बाजार से जुड़े हैं.

अब भारत का शेयर बाजार पहले के मुकाबले कहीं अधिक युवा और डिजिटल हो चुका है. मार्च 2020 में 30 वर्ष से कम उम्र के निवेशकों की हिस्सेदारी जो केवल 23.5 फीसदी थी, वह मई 2026 में बढ़कर 38.3 फीसदी हो गई है. बाजार में कदम रखने वाले नए निवेशकों में से 53 से 59 प्रतिशत लोग युवा हैं. इसी वजह से निवेशकों की औसत उम्र (Median Age) 38 वर्ष से घटकर अब महज 33 वर्ष रह गई है. इसके साथ ही महिला निवेशकों की भागीदारी भी बढ़कर 25 फीसदी तक पहुंच गई है.

चुनिंदा बड़े निवेशकों के हाथ में बाजार की कमान
भले ही देश के छोटे शहरों और युवाओं के बीच निवेश की संस्कृति तेजी से फैल रही है, लेकिन ट्रेडिंग वॉल्यूम और पैसों के लिहाज से बाजार की कमान अब भी कुछ चुनिंदा बड़े निवेशकों (Whales) के हाथों में ही केंद्रित है.

मई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, कैश मार्केट के कुल टर्नओवर में महज 2.6 प्रतिशत सक्रिय निवेशकों की हिस्सेदारी 92.3 फीसदी रही. वहीं, जो निवेशक 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक का ट्रेड करते हैं, वे कुल निवेशकों का सिर्फ 0.3 प्रतिशत हैं, लेकिन बाजार के कुल टर्नओवर में उनका योगदान 79.4 फीसदी है. फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में भी यही स्थिति है, जहां इक्विटी ऑप्शंस के कुल प्रीमियम टर्नओवर का 69 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ 0.3 फीसदी शीर्ष निवेशकों से आता है.

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