भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन निराशाजनक रहा. वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने दलाल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली का माहौल पैदा कर दिया है. मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को शेयर बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में गोता लगाने लगे, जिससे निवेशकों को शुरुआती घंटों में ही करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा.
बाजार का ताजा प्रदर्शन
सेंसेक्स आज सुबह कमजोर रुख के साथ खुला और देखते ही देखते 200 अंकों से अधिक टूटकर 77,094 के स्तर पर आ गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी अपनी मजबूती बरकरार नहीं रख सका और 24,050 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया. बाजार की इस गिरावट ने पिछले कुछ दिनों से जारी स्थिरता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है.
गिरावट के मुख्य कारण
अमेरिका-ईरान तनाव: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध ने बाजार को डरा दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के नए प्रस्ताव को ठुकराए जाने की खबरों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ गया है, जिससे वैश्विक व्यापार आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है.
कच्चे तेल में उबाल: वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड लगातार सातवें दिन बढ़त के साथ 109 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है. भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें देश के चालू खाता घाटे (CAD) और मुद्रास्फीति (महंगाई) को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं.
बैंकिंग शेयरों में बिकवाली: सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे ज्यादा मार पीएसयू (PSU) बैंकों पर पड़ी है, जो करीब 1.6% तक टूट गए हैं. प्राइवेट बैंक भी दबाव में नजर आ रहे हैं.
निवेशकों की रणनीति
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी. विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जो चिंता का विषय है. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी के जरिए बाजार को सहारा देने की कोशिश की है.
आज निवेशकों की नजर मारुति सुजुकी और बजाज फिनसर्व जैसी बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं.


