ज्येष्ठ माह के मंगलवार को “बड़ा मंगल” या “बुढ़वा मंगल” के रूप में जाना जाता है. इस वर्ष ज्येष्ठ मास में कुल पांच बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जिनमें से अंतिम और पांचवां बड़ा मंगल 10 जून को मनाया जाएगा. यदि आप वर्तमान में किसी संकट, भय या कठिन परिस्थिति से गुजर रहे हैं, तो इस दिन विशेष पूजा और पाठ अवश्य करें. माना जाता है कि बड़े मंगल के दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठान विशेष फलदायी होते हैं और हनुमान जी की कृपा से सभी बाधाएं दूर होती हैं.
ज्येष्ठ माह का अंतिम बड़ा मंगल आज 10 जून को मनाया जा रहा है, जिसे श्रद्धा और आस्था के साथ बुढ़वा मंगल के रूप में भी जाना जाता है. यह दिन हनुमान जी की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है. इस शुभ अवसर पर देशभर के हनुमान मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन बजरंगबली की विधिवत पूजा करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं और उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है. ज्येष्ठ मास में कुल पाँच बड़े मंगल आते हैं, जिनमें से चार मंगलवार बीत चुके हैं और अब पाँचवां व अंतिम बड़ा मंगल आने वाला है. आइए जानते हैं बड़ा मंगल की पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त
बड़ा मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा का महत्व
बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा विधिपूर्वक करनी चाहिए. सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनकर हनुमान मंदिर जाएं. मंदिर में पहुंचकर श्रद्धा से हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और आरती का पाठ करें. फिर हनुमान जी को रोली और चंदन का तिलक लगाएं. चूंकि हनुमान जी को लाल रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन लाल वस्त्र जरूरतमंदों को दान करना विशेष फलदायी माना जाता है. इस प्रकार की पूजा से भक्त को विशेष शुभ फल प्राप्त होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.
बड़ा मंगल की पूजा विधि
- ज्येष्ठ माह का अंतिम बड़ा मंगल विशेष पुण्यदायक माना जाता है. इसे “बुढ़वा मंगल” के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन हनुमान जी की पूजा-अर्चना का अत्यंत महत्व होता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक की गई पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और बजरंग बली की कृपा प्राप्त होती है.
- इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ लाल वस्त्र पहनें. घर या मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति अथवा चित्र के सामने दीपक जलाएं. उन्हें रोली, चंदन, सिंदूर और लाल पुष्प अर्पित करें. इसके बाद हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करें. प्रसाद स्वरूप गुड़-चना, बूंदी या लड्डू अर्पित करना शुभ माना जाता है.
- इस अवसर पर लाल वस्त्र, मसूर दाल, गुड़ या मिठाई का दान गरीबों को करें. मंदिर में नारियल चढ़ाएं और चमेली के तेल का दीपक जलाना भी अत्यंत फलदायी होता है. इस विशेष दिन की पूजा जीवन की बाधाओं को समाप्त कर सुख, सफलता और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है.


