Monday, April 6, 2026

हेनले ऑपर्च्युनिटी इंडेक्स 2026 में स्विट्जरलैंड प्रथम है, यह रिपोर्ट बेहतर शिक्षा, करियर और निवेश के जरिए विदेशी नागरिकता पाने के सर्वोत्तम अवसर बताती है.

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 ग्लोबल मोबिलिटी और निवेश प्रवासन के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी संस्था, हेनले एंड पार्टनर्स ने आज अपनी बहुप्रतीक्षित ‘हेनले ऑपर्च्युनिटी इंडेक्स 2026’ रिपोर्ट जारी कर दी है. यह रिपोर्ट दुनिया भर के उन 15 प्रमुख देशों की पहचान करती है जहां निवेश या योग्यता (Merit) के माध्यम से रेजिडेंसी या नागरिकता हासिल करना भविष्य के करियर और आर्थिक समृद्धि के लिए सबसे अधिक लाभकारी है.

पढ़ाई के साथ ‘काम करने का अधिकार’ है असली निवेश
इस वर्ष की रिपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसने अपना ध्यान केवल “कहां पढ़ाई करें” से हटाकर इस बात पर केंद्रित किया है कि “डिग्री के बाद किन देशों में रहने और काम करने का कानूनी अधिकार आसानी से मिलता है.” रिपोर्ट के अनुसार, आज के समय में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है; शैक्षणिक निवेश पर सर्वोत्तम रिटर्न (ROI) तभी मिलता है जब छात्र को उस देश की मजबूत अर्थव्यवस्था और वैश्विक मोबिलिटी का लाभ मिले.

इंडेक्स के शीर्ष देश: स्विट्जरलैंड नंबर 1 पर
2026 के इंडेक्स में स्विट्जरलैंड 86 के स्कोर के साथ दुनिया में पहले स्थान पर है. ज्यूरिख और जेनेवा जैसे शहरों में बैंकिंग, फार्मास्युटिकल रिसर्च और कमोडिटी ट्रेडिंग के मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र ने इसे करियर के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य बनाया है.

सिंगापुर (स्कोर 81) दूसरे और ऑस्ट्रेलिया (स्कोर 80) तीसरे स्थान पर हैं. सिंगापुर को एशिया के व्यापारिक और नवाचार हब के रूप में देखा जा रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया अपनी विश्व स्तरीय शिक्षा और उच्च जीवन स्तर के कारण शीर्ष पर बना हुआ है. ब्रिटेन (UK) और अमेरिका (USA) संयुक्त रूप से चौथे स्थान (स्कोर 79) पर हैं, जो अपनी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज और वित्तीय केंद्रों के कारण आज भी छात्रों और पेशेवरों की पहली पसंद बने हुए हैं.

शीर्ष 15 देशों की सूची

  • स्विट्जरलैंड (86)
  • सिंगापुर (81)
  • ऑस्ट्रेलिया (80)
  • यूके और यूएसए (79)
  • कनाडा (78)
  • ऑस्ट्रिया (69)
  • यूएई (68)
  • न्यूजीलैंड (67)
  • हांगकांग और इटली (65)
  • लातविया और माल्टा (62)
  • पुर्तगाल (61)
  • ग्रीस (59)

भारत की स्थिति और चुनौतियां
भारतीय परिवारों और छात्रों के लिए यह रिपोर्ट एक चेतावनी और अवसर दोनों की तरह है. इंडेक्स में भारत का कुल ऑपर्च्युनिटी स्कोर मात्र 39 है. रिपोर्ट बताती है कि हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, लेकिन यहाँ ग्लोबल रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटीज, वेंचर कैपिटल नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय पेशेवर अवसरों तक पहुँच अभी भी सीमित है.

रिपोर्ट में एक उदाहरण के माध्यम से बताया गया है कि कैसे एक भारतीय परिवार ने अपने बच्चे की पढ़ाई शुरू होने से पहले अमेरिकी EB-5 प्रोग्राम के जरिए रेजिडेंसी हासिल की. अमेरिका का स्कोर 79 है, जो भारत की तुलना में अवसर के वातावरण को लगभग दोगुना कर देता है. रेजिडेंसी होने से बच्चों को पढ़ाई के बाद वीजा की बाधाओं के बिना वहां काम करने और करियर बनाने की आजादी मिली.

यूरोप में बढ़ते अवसर
यूरोपीय देशों में पुर्तगाल (स्कोर 61) और ग्रीस (स्कोर 59) भी तेजी से उभर रहे हैं. पुर्तगाल का ‘गोल्डन रेजिडेंस परमिट’ विशेष रूप से लोकप्रिय है क्योंकि यह 5 साल बाद नागरिकता का मार्ग प्रशस्त करता है, जिससे पूरे यूरोपीय संघ (27 देशों) में रहने और काम करने का अधिकार मिल जाता है.

हेनले ऑपर्च्युनिटी इंडेक्स 2026 यह साफ करता है कि भविष्य की समृद्धि अब केवल पासपोर्ट की शक्ति पर नहीं, बल्कि ‘रणनीतिक निवास’ पर निर्भर है. दुनिया भर के अमीर और प्रतिभाशाली परिवार अब ऐसे देशों का रुख कर रहे हैं जहाँ शिक्षा और करियर के बीच की दूरी को रेजिडेंसी निवेश के माध्यम से कम किया जा सके.

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