अमेरिक की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने जुड़े स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट को लॉन्च पैड से वापस बुला लिया है. यह दोनों यान फ्लोरिडा स्थित Kennedy Space Center के लॉन्च पैड 39B से हटाकर फिर से व्हीकल असेंबली बिल्डिंग (VAB) में ले जाए गए हैं.
नासा के मुताबिक 25 फरवरी 2026 को भारतीय समयानुसार शाम 7:58 बजे यानी अमेरिकी समयानुसार सुबह 9:28 बजे रोलबैक की प्रक्रिया शुरू की गई. करीब 12 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में लगभग 6.4 किलोमीटर की दूरी तय कर रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट को सुरक्षित हैंगर तक पहुंचाया गया. इससे पहले 23 फरवरी को नासा ने आधिकारिक तौर पर रोलबैक का ऐलान कर दिया था.
दरअसल, 21 फरवरी को इंजीनियर्स ने एसएलएस रॉकेट के अपर स्टेज में हीलियम के फ्लो में रुकावट देखी. हीलियम रॉकेट सिस्टम के लिए बेहद जरूरी गैस होती है, जो प्रेशर बनाए रखने और ईंधन सिस्टम को स्थिर रखने में मदद करती है.
लिक्विड हाइड्रोजन लीक की समस्या
इससे पहले वेट ड्रेस रिहर्सल के दौरान लिक्विड हाइड्रोजन के लीक की समस्या भी सामने आई थी. लगातार टेक्निकल प्रॉब्लम्स को देखते हुए मिशन मैनेजमेंट ने एहतियात के तौर पर रॉकेट को लॉन्च पैड से हटाने का फैसला लिया.
एक और वजह फ्लोरिडा के स्पेस कोस्ट इलाके में तेज हवाओं की चेतावनी भी थी. खराब मौसम में इतने बड़े रॉकेट को खुले लॉन्च पैड पर रखना जोखिम भरा हो सकता था. इस कारण प्लेटफॉर्म हटाकर और सिस्टम सुरक्षित करके पूरे ढांचे को VAB में शिफ्ट किया गया. फिलहाल, तकनीशियन हीलियम फ्लो में आई रुकावट की असली वजह तलाश रहे हैं.
नासा ने पहले 20 फरवरी को कहा था कि मिशन 6 मार्च 2026 को लॉन्च करने का लक्ष्य है, लेकिन नई तकनीकी समस्या के बाद अब इसे अप्रैल की लॉन्च विंडो में शिफ्ट कर दिया गया है. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जिनमें तीन नासा के और एक कनाडाई स्पेस एजेंसी के हैं.
यह मिशन करीब 10 दिन का होगा और 1972 में Apollo 17 के बाद पहली बार इंसानों को लो अर्थ ऑर्बिट से आगे ले जाएगा. हालांकि यह मिशन चांद पर लैंडिंग नहीं करेगा और न ही चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करेगा. इसके तहत स्पेसक्राफ्ट चांद के पास से फ्लाईबाय करेगा और फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी से वापस पृथ्वी की ओर लौट आएगा. अब इस रॉकेट की तमाम टेक्निकल टेस्ट्स पूरे होने के बाद ही नई लॉन्च तारीख पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.


