Monday, March 23, 2026

हजारीबाग के चौक-चौराहों का नाम रामनवमी के दौरान बदल दिया जाता है.

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हजारीबाग: जिले की रामनवमी कई कारणों से पूरे देश भर में अपनी अलग पहचान बनाती है. यह एकमात्र ऐसा जिला है जिसके मोहल्ले का नाम रामनवमी के वक्त बदल जाता है. पूरा जिला अयोध्या नगरी के रूप में अपनी पहचान बनाता है. रामनवमी के वक्त हजारीबाग के विभिन्न चौक चौराहों पर अलग नाम का बैनर पोस्टर भी देखने को मिलता है. जैसे जादो बाबू चौक को परशुरामगढ़, कुआं चौक भरत गढ़, झंडा चौक दशरथ गढ़, पंच मंदिर चौक कृष्ण गढ़, गोल चौक अभिमन्यु गढ़, ग्वालटोली चौक नारायण गढ़ और सुभाष मार्ग को अंगद गढ़ के नाम से जाना जाता है.

इसके अलावे भी कई अन्य मोहल्ले का नाम भगवान राम से संबंध रखने वाले देवी देवता के नाम पर रखा जाता है. हजारीबाग में यह परंपरा पिछले कई सालों से चली आ रही है. बताया जाता है कि हजारीबाग को यहां के राम भक्त अयोध्या नगरी के रूप में देखते हैं. यही कारण है कि अयोध्या की तर्ज पर हजारीबाग के विभिन्न चौक चौराहा का नामकरण किया जाता है.

सौ साल पुरानी है नाम बदलने की परंपरा: राजकुमार यादव

रामनवमी महासमिति के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार यादव बताते हैं कि इसका इतिहास 100 साल पुराना रहा है. यह परंपरा रही है कि रामनवमी के वक्त चौक चौराहों का नाम बदलकर अयोध्या में जो मंदिर हैं, उनके नाम पर चौक का नामकरण किया जाता है. इसके पीछे की मान्यता यह है कि यहां के भक्त हजारीबाग को अयोध्या मानते हैं. तभी लाखों की संख्या में राम भक्त रामनवमी जुलूस के दौरान सड़कों पर दिखते हैं. यह एक ऐसी परंपरा है, जिसे आने वाली पीढ़ी निभा रही है.

जुलूस मार्ग के सभी चौक का किया जाता है नामकरण

रामनवमी संरक्षण समिति के अध्यक्ष प्रशांत प्रधान बताते हैं कि हजारीबाग में जो परंपरा पिछले कई सालों से चली आ रही है, उसे नई पीढ़ी भी बरकरार रखी है. चौक-चौराहों का नामकरण भी पिछले कई सालों से चला आ रहा है. रामनवमी महासमिति के अध्यक्ष की जिम्मेवारी होती है कि वह उस चौक की भव्यता को बरकरार रखें. जुलूस मार्ग में पड़ने वाले तमाम चौक का नामकरण किया जाता है.

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