Saturday, March 28, 2026

 सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल करने से ब्लड शुगर पर क्या असर पड़ता है.

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डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है जिसमें शरीर ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने में सक्षम नहीं होता है. यह प्रॉब्लेम तब होती है जब शरीर उचित इंसुलिन नहीं बना पाता या इंसुलिन का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाता है, जिसके कारण ब्लड में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है. इस महामारी से प्रभावित लोगों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. यह डायबिटीज की बीमारी हमारे खान-पान और जीवनशैली के कारण होता है. इसके साथ ही कई अध्ययनों और विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात तक सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल करने से हाई ब्लड शुगर की समस्या बढ़ सकती है. जानें कैसे…

देर रात तक स्क्रीन का इस्तेमाल से कैसे ब्लड शुगर बढ़ सकता है?
देर रात सोने से पहले स्मार्टफोन, टैबलेट और कंप्यूटर जैसी स्क्रीन का इस्तेमाल करने से हाई ब्लड शुगर का खतरा बढ़ सकता है. इन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से निकलने वाली नीली रोशनी नींद के हार्मोन मेलाटोनिन को बाधित करती है, जिससे कोर्टिसोल का लेवल बढ़ जाता है और ग्लूकोज नियंत्रण बिगड़ जाता है. इससे इंसुलिन प्रतिरोध और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ सकता है.

मेलाटोनिन क्या है?
मेलाटोनिन एक हार्मोन है जो हमारे स्लीप साइकिल को कंट्रोल करने में मदद करता है. जब आप सोने से पहले नीली रोशनी वाले डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं, तो यह आपके दिमाग को यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि दिन का समय हो गया है और मेलाटोनिन के लेवल को बढ़ने से रोकता है. जब आपका शरीर पर्याप्त मेलाटोनिन का उत्पादन नहीं करता, तो आपकी नींद की क्वालिटी कम हो जाती है. खराब नींद आपको थका हुआ महसूस कराती है और आपके शरीर के इंसुलिन उत्पादन को प्रभावित करती है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि अपर्याप्त नींद ब्लड शुगर के लेवल को बढ़ा सकती है, जिससे शरीर के लिए ग्लूकोज के लेवल को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है.

क्या कहता है अध्ययन?

द लैंसेट रीजनल हेल्थ – यूरोप में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, रात में रोशनी के संपर्क में आने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है, चाहे आप कितनी भी नींद लें. ऐसा इसलिए है क्योंकि रात में रोशनी हमारे शरीर की आंतरिक घड़ी को बाधित करती है, जिससे हम आराम की बजाय सतर्क अवस्था में रहते हैं. जब हमारा तंत्रिका तंत्र रात में अत्यधिक सक्रिय होता है, तो यह तनाव हार्मोन को बढ़ाता है, जिससे ब्लड शुगर का लेवल बढ़ सकता है.

रात में स्क्रीन पर बहुत ज्यादा समय बिताने के कारण अक्सर नींद की लगातार कमी, समय के साथ इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता में कमी का कारण बन सकती है. डॉक्टर कहते हैं कि यह इंसुलिन प्रतिरोध मोटापा, डायबिटीज और पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है. महिलाओं में, इससे प्रजनन क्षमता और हार्मोन के स्तर में समस्याएं हो सकती हैं. पुरुषों को खराब नींद की आदतों के कारण टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

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