नई दिल्ली: रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंचने के बाद घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में अब कुछ नरमी देखने को मिल रही है। हाल में करीब 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर तक पहुंच चुके सोने में मुनाफावसूली के चलते करेक्शन आया है। त्योहारी और शादी के सीजन से पहले कीमतों में आई इस गिरावट ने खरीदारों, निवेशकों और सर्राफा कारोबारियों का ध्यान खींचा है।
बाजार में फिलहाल यह सवाल बना हुआ है कि मौजूदा गिरावट केवल कुछ समय के लिए है या सोने की कीमतों में आगे भी दबाव देखने को मिल सकता है। इस बीच इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अध्यक्ष और रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के एमडी पृथ्वीराज कोठारी ने सोने की मौजूदा स्थिति और आगे की संभावनाओं पर अपनी राय साझा की है।
सोने में करेक्शन के पीछे कौन से कारण?
पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक, सोने की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के पीछे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार से जुड़े कई कारक हैं।
अमेरिकी ब्याज दरों का असर: अमेरिका के फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद डॉलर और बॉन्ड यील्ड को मजबूती मिली है। ऐसे माहौल में ब्याज नहीं देने वाली संपत्ति के तौर पर सोने की मांग पर असर पड़ सकता है। फेड की ओर से आगे भी दरों को लेकर दिए गए संकेत बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
MCX पर मुनाफावसूली: घरेलू वायदा बाजार में सोने के भाव 1.55 लाख रुपये के आसपास पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूली की। इससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के 4,300 डॉलर प्रति औंस के आसपास रहने के दौरान भी घरेलू बाजार ने अपनी प्रतिक्रिया दिखाई।
खरीदारों का इंतजार: कीमतों में नरमी के बाद कुछ खुदरा खरीदारों ने फिलहाल खरीदारी टाल दी है। ऐसे ग्राहक आगे और गिरावट की संभावना को देखते हुए खरीदारी के लिए बेहतर स्तर का इंतजार कर रहे हैं।
पितृ पक्ष के बाद बढ़ सकती है खरीदारी
26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक पितृ पक्ष रहेगा। परंपरागत मान्यताओं के कारण इस अवधि में कई परिवार सोना और अन्य कीमती सामान खरीदने से परहेज करते हैं। पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार, इस दौरान मांग में आने वाली कमी को मुख्य रूप से मौसमी और सांस्कृतिक कारणों से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
पितृ पक्ष समाप्त होने के बाद नवरात्रि, धनतेरस और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार आएंगे। इसके बाद शादी का सीजन भी शुरू होगा। ऐसे में सर्राफा बाजार में मांग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
कोठारी के अनुसार, यदि सोने की कीमतें मौजूदा स्तरों के आसपास बनी रहती हैं या इनमें कुछ और नरमी आती है, तो त्योहारी और शादी के सीजन में ज्वेलर्स के कारोबार को फायदा मिल सकता है।
आगे किन कारकों पर रहेगी नजर?
आने वाले समय में सोने की कीमतों की दिशा तय करने में अमेरिकी फेड के फैसले, डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने या कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने जैसी परिस्थितियों में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में सोने की मांग को समर्थन मिलने की संभावना रहती है।
वहीं, भारतीय बाजार में रुपये और डॉलर की विनिमय दर भी महत्वपूर्ण होगी। अगर रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत घटने के बावजूद घरेलू बाजार में गिरावट सीमित रह सकती है।
खरीदारों के लिए फिलहाल कैसी स्थिति?
मौजूदा परिस्थितियों में सोने के बाजार में आगे की दिशा कई घरेलू और वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। त्योहार या शादी के लिए सोना खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में होने वाले बदलाव पर नजर रखना जरूरी होगा। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, खरीदारी करने वाले लोग अपनी जरूरत, बजट और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय ले सकते हैं।
