Sunday, April 5, 2026

सूर्य ग्रहण 21 सितंबर के दिन आश्विन अमावस्या को लगने जा रहा है.

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साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को लगने जा रहा है. इस दिन सर्वपितृ अमावस्या भी पड़ रही है, जिससे इस खगोलीय घटना का महत्व और बढ़ गया है. हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और न ही इसका सूतक काल मान्य होगा, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से इसका असर खासकर कन्या राशि वालों पर अधिक देखा जा सकता है.

कन्या राशि वालों पर पड़ेगा असर
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि यह सूर्य ग्रहण कन्या राशि में घटित होगा. ऐसे में इस राशि के जातकों को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है. उनके अनुसार, “ग्रहण काल के दौरान कन्या राशि के लोगों को अचानक धन हानि का सामना करना पड़ सकता है. निवेश से बचना चाहिए और किसी भी प्रकार के पैसों के लेन-देन को टालना ही बेहतर रहेगा.”

आर्थिक नुकसान और कामकाज पर असर
डॉ. शर्मा के अनुसार, नौकरी और व्यापार की गति इस दौरान धीमी पड़ सकती है. उन्होंने कहा, “व्यवसायियों को खासकर बड़े सौदों से बचना चाहिए. किसी नए निवेश या साझेदारी में प्रवेश करना नुकसानदेह साबित हो सकता है. अनजान लोगों पर अंधा विश्वास करने से हानि उठानी पड़ सकती है.”

मानसिक तनाव और पारिवारिक टकराव
सूर्य ग्रहण का असर सिर्फ आर्थिक स्थिति पर ही नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन पर भी पड़ेगा. डॉ. शर्मा ने कहा कि “निर्णय लेने में असमंजस रहेगा और कार्यस्थल पर दबाव बढ़ सकता है. निजी जीवन में भी टकराव और पारिवारिक अशांति देखने को मिल सकती है. ऐसे में जातकों को धैर्य और संयम बनाए रखने की जरूरत है.”

क्या करें और क्या न करें
हालांकि भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका धार्मिक महत्व सीमित है. फिर भी डॉ. शर्मा ने सलाह दी कि “ग्रहण के दिन भगवान का स्मरण करें, स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें और गायत्री मंत्र का जप करें. दान-पुण्य करने से ग्रहण के दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं.”

ग्रहण के बाद अगले दिन गेहूं, गुड़, तांबा या अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र और धन का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है. इस प्रकार, 21 सितंबर को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण ज्योतिषीय दृष्टि से कन्या राशि वालों के लिए सावधानी बरतने का संदेश देता है.

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