Friday, March 27, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, ऑपरेशन सिंदूर में भाग लेने से उसे घर पर अत्याचार करने से छूट नहीं मिलती.

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दहेज के लिए पत्नी की हत्या के मामले के एक दोषी को सरेंडर की छूट देने से इनकार कर दिया. अदालत ने सुनवाई करते हुए मामले पर सख्त टिप्पणी की. अदालत ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर में भाग लेने से आपको घर पर अत्याचार करने की छूट नहीं मिल जाती है.

यह मामला जस्टिस उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की बेंच के समक्ष आया. बेंच पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी. हाई कोर्ट ने शख्स की अपील को खारिज करते हुए उसकी सजा को बरकरार रखा था.

सुनवाई के दौरान बेंच ने स्पष्ट किया कि वह शख्स को छूट देने के लिए इच्छुक नहीं है. याचिकाकर्ता के वकील ने अपने मुवक्किल की सैन्य पृष्ठभूमि पर जोर दिया. वकील ने तर्क दिया कि उसने ऑपरेशन सिंदूर में भाग लिया था. वह पिछले 20 सालों से, राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात एक ब्लैक कैट कमांडो है.

बेंच ने कहा कि इससे उसे (ब्लैक कैट कमांडो) घर पर अत्याचार करने से छूट नहीं मिलती. बेंच ने कहा, इससे पता चलता है कि शख्स शारीरिक रूप से कितना फिट हैं और वह अकेले किस तरह से अपनी पत्नी का गला घोंट सकता था. आत्मसमर्पण से छूट मांगने वाली प्रार्थना के संबंध में, बेंच ने कहा कि इस तरह की सुरक्षा हल्की सजा वाले अपराधों के लिए आरक्षित है.

बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि, जिस तरह उसने अपनी पत्नी का गला घोंटा वह वीभत्स है. आत्मसमर्पण से छूट उन मामलों में है, जहां सजा छह महीने या एक साल है…याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें सुनने के बाद, बेंच ने कहा कि वह अपील पर नोटिस जारी कर सकती है, लेकिन आत्मसमर्पण से सुरक्षा की प्रार्थना पर विचार नहीं करेगी. याचिकाकर्ता के वकील ने आत्मसमर्पण करने के लिए समय मांगा.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस पर हामी भरते हुए याचिकाकर्ता को आत्मसमर्पण करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है. हालांकि, अदालत ने समय को और आगे बढ़ाने से इनकार करते हुए कहा कि, अब कोई ऑपरेशन सिंदूर नहीं है.

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