सीएम हेमंत सोरेन ने शीतकालीन सत्र के समापन भाषा में विपक्ष को निशाने पर रखा. कहा कि विपक्ष का काम सरकार के कामों का आइना दिखाना है लेकिन ये सदन से गायब हैं. सरकार के अभी एक साल पूरे नहीं हुए हैं. लेकिन एक साल में लंबी गाढ़ी लकीर खींच दी है.
राज्य के सर्वांगीण विकास की राह में तेजी से चलना शुरू कर दिया है. ये शीतकालीन सत्र ही नहीं बल्कि न भूलने वाला विधानसभा का 25वां वर्ष भी है. युवा राज्य ऊर्जा से लवरेज है. आगे बढ़ने को तत्पर है.
सत्र शुरू होने से लेकर समाप्ति तक विपक्ष के गायब रहने के पीछे कई कारण हैं. उनके पास न मुद्दा है, न सवाल है न तर्क है और न संवेदना है. विपक्ष ने सवालों से घेरने का प्रयास भी नहीं किया.
सीएम ने कहा कि विपक्ष ने पहले छात्रवृत्ति का मुद्दा उठाया. लेकिन इसमें भी केंद्र सरकार का सौतेला व्यवहार परिलक्षित हो रहा है. विपक्ष को सवाल उठाने से पहले अपने गिरेबां में झांकना चाहिए. अपने आला-नेताओं से विचार-विमर्श करना चाहिए. कई एक बजट में भी कटौती की. कई स्कूलों को बंद करा दिया.
केंद्र सरकार ने दलित आदिवासी पिछड़ों के साथ अनुसूचित जाति को उच्च शिक्षा में मिलने वाली छात्रवृत्ति में 90 फीसदी, विदेश छात्रवृत्ति में 95 फीसदी, अल्पसंख्यक प्री मैट्रिक में 40 फीसदी, पोस्ट मैट्रिक में 63 फीसदी, मेधा आधारित छात्रवृत्ति टेक्नीकल और व्यवसायिक में 75 फीसदी और तकनीकी शिक्षण संस्थान के अनुदान में 61 फीसदी की कटौती कर दी. ऐसी स्थिति में विपक्ष की मांग उचित नहीं है.
सीएम ने कहा कि हमलोग छात्रवृत्ति बढ़ाने वाले लोग हैं. गुरुजी क्रेडिट कार्ड में 15 लाख रुपए का ऋण सिर्फ चार फीसदी व्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है. सावित्री बाई फूले योजना चलाई जा रही है. प्राइवेट स्कूलों के तर्ज पर स्कूलों को खड़ा कर रहे हैं.
कई जगह छात्रवृत्ति में बढ़ोत्तरी हुई है. धीरे-धीरे शिक्षा में नया आयाम जुड़ रहा है. आज बड़े प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी स्थापित हो रहे हैं. कई आने वाले भी है. 25 साल का रोडमैप बनाया गया है. मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था की गई है. एक बेहतर भविष्य के साथ आगे जाएंगे.
सुझाव होना चाहिए था कि बजट में बढ़ोत्तरी हो
सीएम ने कहा कि 7721 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश हुआ. सुझाव इसमें बढ़ोत्तरी का होना चाहिए था. देश के विकास में झारखंड की अहम भूमिका रही है. रेलवे से भारत को सबसे अधिक रेवेन्यू मिलता है. लेकिन इसके बदले हमें धूल मिट्टी पलायन और प्रदूषण मिलता है.
ये आजकल कटौती का नया रूप लेकर आए हैं. आपका राशन, आपका वोट, आपकी बिजली और आपका घर तोड़ेंगे. आज लोकसभा में वंदे मातरम पर बहस हो रही है. क्या इससे गरीबी खत्म होगी क्या इससे रोजगार सृजन होगा.
इन लोगों ने गरीबों का निवाला छीन लिया है. इंडिगो जैसी घटना से लाखों प्रभावित हुए. जब-जब कोई घटना होती है तो ये दूसरे विषयों और मुद्दों से लोगों को भटकाते हैं. एआइआर पर अलग-अलग राज्यों में जहर उगला जा रहा है. बॉर्डर तो भारत सरकार के जिम्मे है.
अनुपूरक बजट व्यवस्था भी और आवश्यक भी
सीएम ने कहा कि अनुपूरक बजट व्यवस्था भी है और आवश्यक भी. सरकार नियम संगत कार्य करती है. छोटा सत्र है लेकिन हर छोटा चीज बड़ा हो सकता है. विपक्ष का आचरण अखबार में छपने और सदन को बाधित करने का रहा है. सदन में सवाल होते. सरकार उनके सवालों का जवाब बहुत संतुष्टि से दे सकती है.


