रांची: संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सर्कोन-2026 का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में सर्कुलर इकोनॉमी यानी ऐसी अर्थव्यवस्था की अवधारणा पर विशेष चर्चा हुई, जिसमें संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के साथ-साथ कचरे को कम करने, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है।
आयोजन के दौरान विशेषज्ञों, उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभागियों ने नवाचार आधारित सर्कुलैरिटी की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक और नए विचारों के माध्यम से संसाधनों के टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देना रहा।
नवाचार को बनाया गया कार्यक्रम का केंद्र
सर्कोन-2026 में नवाचार को सर्कुलर इकोनॉमी के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि तेजी से बढ़ती आबादी और संसाधनों की बढ़ती मांग के बीच पारंपरिक उत्पादन और उपभोग के तरीकों में बदलाव जरूरी है।
सर्कुलर मॉडल में किसी उत्पाद या संसाधन को इस्तेमाल के बाद बेकार मानने के बजाय उसे दोबारा उपयोग में लाने, उसकी मरम्मत करने, पुनर्चक्रण करने या नए उत्पाद के निर्माण में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाता है। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने के साथ-साथ कचरे की मात्रा को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में इस दिशा में तकनीकी नवाचार की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया।
कचरा प्रबंधन को लेकर हुई चर्चा
सर्कोन-2026 में कचरा प्रबंधन भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ ठोस कचरे की समस्या भी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
ऐसे में केवल कचरे को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि कचरे को स्रोत पर ही अलग किया जाए और उसमें मौजूद उपयोगी सामग्री को दोबारा आर्थिक गतिविधियों में शामिल किया जाए।
इस दौरान रिसाइक्लिंग, रीयूज और रिसोर्स रिकवरी जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि कचरे को संसाधन के रूप में देखने की सोच विकसित करने की आवश्यकता है।
उद्योग जगत की भूमिका महत्वपूर्ण
कार्यक्रम में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने में उद्योगों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्पादन प्रक्रिया में संसाधनों की खपत कम करने, टिकाऊ सामग्री का इस्तेमाल बढ़ाने और उत्पादों की जीवन अवधि बढ़ाने से सर्कुलर मॉडल को मजबूत किया जा सकता है।
उद्योगों को ऐसी तकनीकों और प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर चर्चा हुई, जिनसे उत्पादन के दौरान कम से कम अपशिष्ट पैदा हो और इस्तेमाल की गई सामग्री को दोबारा उत्पादन चक्र में शामिल किया जा सके।
इसके अलावा उत्पाद डिजाइन में भी बदलाव की जरूरत बताई गई। ऐसे उत्पादों को प्राथमिकता देने की बात कही गई जिन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सके और खराब होने के बाद उनकी मरम्मत या रिसाइक्लिंग संभव हो।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है सर्कुलर मॉडल
सर्कुलर इकोनॉमी का सीधा संबंध पर्यावरण संरक्षण से भी है। मौजूदा आर्थिक व्यवस्था में बड़ी मात्रा में प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर उत्पाद तैयार किए जाते हैं और उपयोग के बाद उनका बड़ा हिस्सा कचरे में बदल जाता है।
इसके विपरीत सर्कुलर मॉडल संसाधनों को अधिक समय तक उपयोग में बनाए रखने की कोशिश करता है। इससे नए कच्चे माल की जरूरत कम हो सकती है और कचरे के निपटारे का दबाव भी घटाया जा सकता है।
सर्कोन-2026 में इसी सोच को आगे बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग विकसित करने पर जोर दिया गया।
नई तकनीक से मिल सकती है मदद
कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि डिजिटल तकनीक और आधुनिक वैज्ञानिक समाधान सर्कुलर इकोनॉमी को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
डेटा आधारित निगरानी, स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट, रिसोर्स ट्रैकिंग और आधुनिक रीसाइक्लिंग तकनीकों के माध्यम से संसाधनों के उपयोग को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने इस दिशा में स्टार्टअप और नई तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों की भूमिका को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार, स्थानीय स्तर की समस्याओं के लिए स्थानीय और नवाचार आधारित समाधान विकसित करने की काफी संभावनाएं हैं।
युवाओं और स्टार्टअप के लिए अवसर
सर्कोन-2026 जैसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं और स्टार्टअप को पर्यावरण और संसाधन प्रबंधन से जुड़े नए क्षेत्रों में काम करने के अवसर मिल सकते हैं।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि सर्कुलर इकोनॉमी केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह रोजगार और नए व्यवसाय के अवसर भी पैदा कर सकती है।
रीसाइक्लिंग, रिपेयर, रीयूज, अपशिष्ट से ऊर्जा, रिसोर्स रिकवरी और टिकाऊ उत्पाद निर्माण जैसे क्षेत्रों में नए उ
