झारखंड में धान खरीद में देरी का लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं. किसानों से औने-पौने दाम में धान की खरीद की जा रही है.
रांची:झारखंड में इस वर्ष हुई अच्छी मानसूनी बारिश की वजह से धान की बंपर उपज होने की उम्मीद है तो सरकार ने भी इस वर्ष राज्य के किसानों को उनके धान की राशि एकमुश्त देने का फैसला किया है. धान खरीद के लिए पूर्व में निर्धारित 15 दिसंबर की तिथि को भी घटाई गई है. यानी इस बार जल्दी ही धान की सरकारी स्तर पर खरीद शुरू होनेवाली है. लेकिन सरकार और खाद्य-आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के तमाम उपायों के बावजूद राज्य में बिचौलिए सरकारी व्यवस्था से ज्यादा फास्ट नजर आ रहे हैं. अभी से ही बिचौलिए गांव-गांव जाकर किसानों से औने-पौने दाम में धान खरीदना शुरू कर दिया है.
रांची के बड़गांई के किसान मछेन्द्र साहू और कांके प्रखंड की किसान सोनी देवी ने अपने धान को 1600 से 1700 रुपये क्विंटल यानी 16-17 रुपये किलो बेच दिया है. जबकि राज्य सरकार ने इस वर्ष धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपये प्रति क्विंटल और प्रति क्विंटल 100₹ का बोनस निर्धारित किया है. यानी जिस धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य कुल मिलाकर 2469₹ प्रति क्विंटल है, उसे बिचौलिए महज 1600-1700₹ प्रति क्विंटल में खरीद ले रहे हैं.
किसान क्यों 16-17 रुपये किलो धान बेच रहे हैं?
इस सवाल का जवाब जानने के लिए जब ईटीवी भारत संवाददाता उपेन्द्र कुमार ने किसानों से बात की तो ज्यादातर किसानों का जवाब यह था कि उन्हें आगे की खेती-बाड़ी, शादी-विवाह और अन्य जरूरतों के लिए तत्काल पैसे की जरूरत है. सरकार ने अभी धान खरीद शुरू नहीं की है और जब खरीद शुरू होगी तो फिर कई किंतु-परंतु के साथ भुगतान में देरी. ऐसे में सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम कीमत पर ही धान को बेचकर तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के सिवा कोई और रास्ता नहीं बचा है.
इस वर्ष झारखंड में धान के बंपर उत्पादन का अनुमान
राज्य में इस वर्ष 17 लाख 88 हजार हेक्टेयर में धान लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसकी तुलना में 16 लाख 58 हजार हेक्टेयर में धान का आच्छादन हुआ है. अच्छी मानसूनी बारिश और किसानों की मेहनत से इस वर्ष राज्य में धान का उत्पादन अच्छा होने का अनुमान है. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने इस वर्ष 48 लाख टन के करीब धान उत्पादन की उम्मीद जताई है.
विभाग के अनुसार इस वर्ष राज्य में कुल मिलाकर 55 लाख टन से अधिक खाद्यान्न उत्पादन संभव है. इसकी वजह यह है कि इस वर्ष राज्य में 22 लाख 11 हजार हेक्टेयर में धान सहित अन्य खाद्यान्न की फसल लगाई गई थी. ऐसे में विभाग को उम्मीद है कि इस वर्ष राज्य में करीब 24 हजार हेक्टेयर में तिलहन की फसल से 29 हजार टन तिलहन, 01 लाख 97 हजार हेक्टेयर में लगाये गए मक्का की फसल से 04 लाख 34 हजार टन मक्का होने के साथ-साथ 34 हजार हेक्टेयर में लगे मडुआ की फसल से करीब 40 हजार टन मड़ुआ होने का अनुमान है.

पड़ोसी राज्यों में धान खरीद शुरू, झारखंड में देरी क्यों?
धान खरीद में बिचौलिया हावी नहीं हों और समय पर किसानों के पॉकेट में पैसे आ जाएं, इसलिए झारखंड के पड़ोसी राज्यों में धान की खरीद शुरू हो चुकी है. पश्चिम बंगाल में 01 नवंबर से तो बिहार और छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से ही धान की सरकारी स्तर पर खरीद शुरू हो गई है. अगर इसी तरह झारखंड में धान की क्रय शुरू हो जाती तो किसान अपने पसीने से उपजाई गई फसल को औने-पौने दाम पर बिचौलियों को बेचने के लिए मजबूर नहीं होते.
सरकारी व्यवस्था में ही धान बेचें किसान-कृषि मंत्री
राज्य में सरकारी स्तर पर धान क्रय से पहले ही गांव-गांव में धान खरीदने के लिए बिचौलिए के सक्रिय होने को लेकर पूछे गए सवाल पर राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि उन्होंने राज्य के अन्नदाता किसानों से अपील की है कि वह धान बिचौलियों के हाथों न बेचें. उन्होंने कहा कि सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य के अलावा प्रति क्विंटल 100 रुपये बोनस भी देने जा रही है. इसका लाभ किसान उठाएं.

कृषि मंत्री ने कहा कि जल्द से जल्द राज्य में धान खरीद सरकारी स्तर पर शुरू हो जाए इसके लिए उन्होंने झारखंड स्टेट फूड कॉर्पोरेशन(JSFC) के एमडी से बात की है. कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि इस बार किसानों के हितों को देखते हुए सरकारी स्तर पर धान बिक्री होते ही पूरी राशि किसानों को दे दी जाएगी. पहले किसानों को दो किस्तों में राशि दी जाती थी. शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि गांव-गांव के बिचौलियों का पहुंचना और औने-पौने रेट पर धान खरीदना गंभीर मामला है.


