नई दिल्ली: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला जारी कर दी है, जिसमें आधार वर्ष 2012 की जगह अब 2024 (2024=100) कर दिया गया है. यह बदलाव देश में महंगाई मापने की पद्धति को वर्तमान उपभोग पैटर्न के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. नई श्रृंखला के अनुसार जनवरी 2026 में वार्षिक महंगाई दर 2.75 प्रतिशत (प्रावधिक) दर्ज की गई है.
क्यों किया गया आधार वर्ष में बदलाव?
मंत्रालय के अनुसार, नई सीपीआई श्रृंखला को 2023-24 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य लोगों की मौजूदा खर्च करने की आदतों को बेहतर तरीके से दर्शाना है.
आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 करने से अब सूचकांक में शामिल वस्तुओं और सेवाओं का भार (वेटेज) वर्तमान उपभोग के अनुसार तय किया गया है. इससे महंगाई का आकलन अधिक सटीक और वास्तविकता के करीब होगा, जो नीति-निर्माताओं, कारोबारियों और आम नागरिकों के लिए उपयोगी साबित होगा.
नई संरचना में 12 वर्ग
पहले सीपीआई में 6 बड़े समूह होते थे, लेकिन अब इसे अंतरराष्ट्रीय मानक ‘क्लासिफिकेशन ऑफ इंडिविजुअल कंजम्प्शन अकॉर्डिंग टू पर्पस (COICOP) 2018’ के अनुसार 12 वर्गों में बांटा गया है. इसके साथ ही अब अखिल भारतीय और राज्य स्तर पर, ग्रामीण-शहरी और संयुक्त श्रेणी के लिए वस्तु-स्तर के सूचकांक भी जारी किए जाएंगे. इससे महंगाई के रुझानों का अधिक सूक्ष्म विश्लेषण संभव होगा.

किन वस्तुओं को जोड़ा और हटाया गया?
नई श्रृंखला में कई आधुनिक वस्तुओं और सेवाओं को शामिल किया गया है. इनमें ग्रामीण आवास, ऑनलाइन मीडिया/स्ट्रीमिंग सेवाएं, वैल्यू एडेड डेयरी उत्पाद, जौ और उसके उत्पाद, पेन ड्राइव और एक्सटर्नल हार्ड डिस्क, अटेंडेंट और बेबीसिटर जैसी सेवाएं तथा व्यायाम उपकरण शामिल हैं.
वहीं, बदलती तकनीक और कम उपयोग के कारण वीसीआर, वीसीडी/डीवीडी प्लेयर, रेडियो, टेप रिकॉर्डर, सीडी/डीवीडी कैसेट, कोयर/रस्सी जैसी वस्तुओं को सूची से हटा दिया गया है. मंत्रालय का कहना है कि इन बदलावों से सूचकांक आज की जीवनशैली के अनुरूप बन पाया है.
जनवरी में खाद्य महंगाई की स्थिति
जनवरी 2026 में अखिल भारतीय उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) 2.13 प्रतिशत रहा. ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 1.96 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 2.44 प्रतिशत दर्ज की गई. खाद्य और पेय पदार्थों में कुल वृद्धि 2.11 प्रतिशत रही. स्वास्थ्य सेवाओं में 2.19 प्रतिशत और मनोरंजन, खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों में 2.32 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
शिक्षा और कपड़ों में अधिक बढ़ोतरी
विभिन्न श्रेणियों में शिक्षा सेवाओं में सबसे अधिक 3.35 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई. इसके बाद कपड़े और जूते-चप्पल में 2.98 प्रतिशत तथा होटल-रेस्तरां और आवास सेवाओं में 2.87 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. आवास, जल, बिजली, गैस और अन्य ईंधन में 1.53 प्रतिशत तथा घरेलू साज-सज्जा और उपकरणों में 1.45 प्रतिशत की वृद्धि हुई.
व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और विविध वस्तुओं की श्रेणी में 19.02 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो जनवरी महीने की सबसे अधिक बढ़ने वाली श्रेणी रही.
परिवहन और संचार में स्थिरता
जनवरी में परिवहन क्षेत्र में महंगाई दर मात्र 0.09 प्रतिशत रही, जबकि सूचना और संचार क्षेत्र में 0.16 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई. इससे संकेत मिलता है कि इन क्षेत्रों में कीमतें लगभग स्थिर बनी रहीं.
सबसे सस्ती हुईं ये वस्तुएं
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 में कई खाद्य वस्तुओं के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई.
- लहसुन के दाम में लगभग 53 प्रतिशत की कमी
- प्याज में 29 प्रतिशत गिरावट
- आलू में 29 प्रतिशत कमी
- अरहर (तूर) दाल में 24.90 प्रतिशत की गिरावट
- मटर के दाम में 16 प्रतिशत की कमी
इन प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट से घरेलू बजट पर दबाव कम हुआ और खाद्य महंगाई नियंत्रित रही.

इन वस्तुओं के दाम में तेज उछाल
- इसके विपरीत कुछ वस्तुओं में तेज बढ़ोतरी भी दर्ज की गई.
- चांदी के आभूषणों में 160 प्रतिशत की भारी वृद्धि
- टमाटर में 64 प्रतिशत की बढ़ोतरी
- खोपरा में 47 प्रतिशत की वृद्धि
- सोना, हीरा और प्लेटिनम आभूषणों में 47 प्रतिशत बढ़ोतरी
- नारियल तेल में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि
इन वस्तुओं की कीमतों में तेजी से यह स्पष्ट होता है कि अलग-अलग श्रेणियों में मूल्य वृद्धि का रुझान अलग रहा.
आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि 2.75 प्रतिशत की महंगाई दर फिलहाल नियंत्रित दायरे में है. नई सीपीआई श्रृंखला से सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को नीतिगत फैसले लेने में अधिक सटीक आंकड़े मिलेंगे. नई संरचना के कारण महंगाई का आकलन अब लोगों के वास्तविक खर्च के करीब होगा, जिससे आर्थिक नीतियों की प्रभावशीलता बढ़ने की उम्मीद है.
कुल मिलाकर, आधार वर्ष 2024 के साथ जारी नई सीपीआई श्रृंखला देश की बदलती अर्थव्यवस्था और उपभोग पैटर्न को दर्शाने की दिशा में एक अहम कदम है, जो आने वाले समय में महंगाई के आकलन को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगा.


