मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन ‘ब्लैक मंडे’ साबित हुआ. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने घरेलू निवेशकों के सेंटिमेंट को बुरी तरह झकझोर दिया है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 1,555.62 अंक (2.08%) गिरकर 72,977.34 पर आ गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 479.95 अंक (2.07%) फिसलकर 22,634.55 के स्तर पर खुला.
इस भारी गिरावट के कारण शुरुआती चंद मिनटों में ही निवेशकों की लगभग 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति खाक हो गई.
गिरावट के मुख्य कारण
ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. तनाव कम होने के बजाय बढ़ता दिख रहा है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है.
कच्चे तेल में उबाल
सप्लाई चेन बाधित होने के डर से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 113 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने और व्यापार घाटा गहराने का डर है.
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग रूट ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ में जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध की खबरों ने ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है.
विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. पिछले सत्र में उन्होंने 5,518 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे.
इन शेयरों और सेक्टरों में रही सबसे ज्यादा मार
बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली. मेटल, पीएसयू बैंक और ऑटो इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जिनमें 3% तक की गिरावट दर्ज की गई.
टॉप लूजर्स: टाटा स्टील, हिंडाल्को, एचडीएफसी बैंक, जेएसडब्ल्यू स्टील, बजाज फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई.
वैश्विक बाजारों का हाल
केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरा एशियाई बाजार लाल निशान में रहा. जापान का निक्केई (Nikkei) 5%, दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 6% और हांगकांग का हैंगसेंग 3.5% तक टूट गए. अमेरिकी बाजारों में भी पिछला सत्र गिरावट के साथ बंद हुआ था.
एक्सपर्ट की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक युद्ध शांत होने के संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी. निफ्टी के लिए अब 22,800 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट था जो टूट चुका है, अब प्रतिरोध 23,400–23,600 के दायरे में देखा जा रहा है. विश्लेषकों ने निवेशकों को फिलहाल आक्रामक खरीदारी से बचने और गिरावट पर केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों को ही धीरे-धीरे खरीदने की सलाह दी है


