Saturday, March 28, 2026

शिबू सोरेन के लिए भारत रत्न की मांग इंडिया ब्लॉक कर रहा है- बाबूलाल मरांडी के दांव से सियासी हलचल बढ़ गई .

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रांची: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र (22-28 अगस्त 2025) के अंतिम दिन, 28 अगस्त को दिशोम गुरु शिबू सोरेन को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया. यह प्रस्ताव अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन, जिनका 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया, को यह सम्मान देने की मांग पर पूरे सदन का स्वर एकजुट नजर आया. हालांकि, इस बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने विनोद बिहारी महतो और मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा को भी भारत रत्न देने की मांग उठाकर सत्ताधारी गठबंधन की चिंताएँ बढ़ा दीं. इसे राजनीतिक हलकों में मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है.

परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया गया. बिरुआ ने कहा, “दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने आदिवासियों, किसानों, मजदूरों और शोषितों के अधिकार, सम्मान और स्वाभिमान के लिए अपना जीवन समर्पित किया. अलग झारखंड राज्य के लिए उनका संघर्ष ऐतिहासिक है. वे न केवल एक राजनीतिक नेता थे, बल्कि एक विचार और आंदोलन थे. उन्हें भारत रत्न देना सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

बाबूलाल मरांडी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी (भाजपा) इसका स्वागत करती है, लेकिन उन्होंने विनोद बिहारी महतो और मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा को भी भारत रत्न देने की मांग उठाई. मरांडी ने कहा, “यह ऐतिहासिक निर्णय है. मैं प्रस्ताव में झारखंड आंदोलन के दो अन्य अग्रदूतों मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और विनोद बिहारी महतो के नाम जोड़ने का सुझाव देता हूं.”

इस मांग ने सत्ताधारी गठबंधन (झामुमो, कांग्रेस, राजद) को असहज कर दिया. सत्ताधारी दल इस मुद्दे पर सावधानी से अपनी बात रख रहे हैं, क्योंकि महतो और मुंडा को नजरअंदाज करने का आरोप उनकी राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है.

आजसू के मांडू विधायक तिवारी महतो ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि विनोद बिहारी महतो और जयपाल सिंह मुंडा के योगदान को झारखंड की राजनीति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ईटीवी भारत से बातचीत में उन्होंने कहा, “विनोद बिहारी महतो के सान्निध्य और सहयोग से ही शिबू सोरेन दिशोम गुरु बन सके. उन्हें भी भारत रत्न मिलना चाहिए. झारखंड निर्माण में महतो, निर्मल महतो, एके रॉय और जयपाल सिंह मुंडा जैसे नेताओं की भूमिका को भुलाकर कोई राजनीति नहीं कर सकता. अगर इनके नाम भी प्रस्ताव में शामिल होते, तो विधानसभा की गरिमा और बढ़ती.”

बाबूलाल मरांडी ने नहीं की राजनीति: प्रदीप सिन्हा

झारखंड भाजपा प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने बाबूलाल मरांडी की मांग का समर्थन करते हुए कहा, “हमारे नेता ने झारखंड आंदोलन के दो बड़े नेताओं विनोद बिहारी महतो और जयपाल सिंह मुंडा को भारत रत्न देने की सलाह दी है. इसमें न तो कोई राजनीति है और न ही किसी को गुमराह करने की कोशिश. लोकतंत्र में विपक्ष अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र है.”

सत्ताधारी दल की दुविधा, सावधानी से जवाब

सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं के बयानों से उनकी दुविधा साफ झलकती है. झामुमो विधायक और पूर्व मंत्री हेमलाल मुर्मू ने कहा, “विनोद बिहारी महतो और जयपाल सिंह मुंडा को भी भारत रत्न मिले, इससे हमें कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन अभी देशभर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का माहौल है.”

झामुमो के मुख्य सचेतक मथुरा महतो ने कहा, “फिलहाल शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की बात हो रही है. बाद में विनोद बिहारी महतो और जयपाल सिंह मुंडा का नाम भी भेजा जाएगा.”

वहीं, झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने बाबूलाल मरांडी पर निशाना साधते हुए कहा, “बाबूलाल मरांडी भी झारखंड के मुख्यमंत्री रहे हैं. तब उन्होंने विनोद बिहारी महतो और जयपाल सिंह मुंडा के लिए भारत रत्न की मांग क्यों नहीं उठाई? यह महतो और मुंडा समाज की राजनीति करने की कोशिश है.”

कांग्रेस विधायक और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा ने मरांडी की मांग को कोरी राजनीति करार दिया. उन्होंने कहा, “अगर बाबूलाल मरांडी की मंशा विनोद बिहारी महतो और जयपाल सिंह मुंडा को भारत रत्न दिलाने की थी, तो डबल इंजन की सरकार में ऐसा क्यों नहीं हुआ? यह केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है.”

शिबू सोरेन, जिन्हें ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जाना जाता है, ने झारखंड आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. उनके निधन के बाद भी उनकी राजनीतिक विरासत झारखंड की सियासत में केंद्र में बनी हुई है. 28 अगस्त को विधानसभा में पारित प्रस्ताव और बाबूलाल मरांडी की मांग ने न केवल उनकी विरासत को बल्कि झारखंड आंदोलन के अन्य नेताओं के योगदान को भी चर्चा में ला दिया है. यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा, लेकिन मरांडी के दांव ने सत्ताधारी गठबंधन को नए सियासी समीकरणों पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है.

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