अमेरिका द्वारा भारत सहित 54 देशों पर प्रस्तावित ‘धारा 301’ के तहत 25 प्रतिशत तक के अतिरिक्त आयात शुल्क के खिलाफ व्यापार विशेषज्ञों ने भारत सरकार को कड़ा रुख अपनाने की सलाह दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अमेरिकी जांच के कानूनी आधार को चुनौती देनी चाहिए और इस मामले को आगामी द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं में मजबूती से उठाना चाहिए.
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने एक विवादित प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत उन देशों पर भारी जुर्माना लगाने की बात कही गई है जिनके पास तीसरे देशों से आने वाले ‘जबरन श्रम’ से बने सामान पर रोक लगाने के कड़े नियम नहीं हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यह जांच धारा 301 के पारंपरिक दायरे से बाहर जाकर की जा रही है. अमेरिकी प्रशासन इस नए नियम के जरिए एकतरफा दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसे भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चुनौती देनी चाहिए.
भारत पर क्या होगा असर?
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, यह प्रस्ताव अमेरिका द्वारा भारत पर दबाव बनाने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है. भारत को यह तर्क देना चाहिए कि किसी एक क्षेत्र या उत्पाद की समस्या के आधार पर पूरे देश के निर्यात पर भारी प्रतिबंध लगाना पूरी तरह से अनुचित और असंगत है. यदि यह टैरिफ लागू होता है, तो भारत के कपड़ा, गारमेंट्स, कालीन, चमड़ा उत्पाद और रत्न जैसे श्रम-प्रधान निर्यात क्षेत्रों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा.
विशेषज्ञों की रणनीति और सलाह
ईवाई (EY) इंडिया के ट्रेड पॉलिसी लीडर अग्नेस्वर सेन ने बताया कि अमेरिका वर्तमान में लागू 10 फीसदी के अस्थायी शुल्कों (धारा 122 के तहत) को बदलने के लिए एक मजबूत कानूनी आधार तलाश रहा है, क्योंकि पुराना आधार डब्ल्यूटीओ (WTO) के नियमों के तहत कमजोर माना गया है.
विशेषज्ञों ने भारत सरकार को कदम उठाने की सलाह दी है
लिखित आपत्ति दर्ज करें: भारत को 1 जुलाई की समयसीमा से पहले अमेरिकी प्रशासन के समक्ष अपनी विस्तृत लिखित आपत्तियां और साक्ष्य जमा करने चाहिए.
सार्वजनिक सुनवाई में हिस्सा लें: 7 जुलाई को होने वाली अमेरिकी सार्वजनिक सुनवाई में सक्रिय रूप से भाग लेकर इसके निष्कर्षों को चुनौती देनी चाहिए.
द्विपक्षीय वार्ता का उपयोग: 1 से 4 जून तक नई दिल्ली में चल रही भारत-अमेरिका व्यापार प्रतिनिधिमंडल की बैठक का लाभ उठाकर इस अतिरिक्त शुल्क से पूरी तरह छूट या इसे वापस लेने की मांग करनी चाहिए.
चूंकि मौजूदा अमेरिकी शुल्क आगामी 24 जुलाई को समाप्त हो रहे हैं, इसलिए आने वाले कुछ सप्ताह भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे. भारत को अपनी संप्रभुता और निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर आक्रामक रुख अपनाना होगा.


