Sunday, August 9, 2026

विश्व आदिवासी दिवस पर सम्मानित हुईं सोहराय कलाकार पुतली गंझू, विदेशों तक पहुंचाई झारखंड की लोककला.

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हजारीबाग: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आयोजित झारखंड आदिवासी महोत्सव में हजारीबाग की चर्चित सोहराय कलाकार पुतली गंझू को सम्मानित किया गया। पारंपरिक सोहराय कला को देश-विदेश में पहचान दिलाने के लिए उनके योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान दिया गया।

पुतली गंझू लंबे समय से सोहराय चित्रकला को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं। उनकी कला ने हजारीबाग की पारंपरिक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

45 से ज्यादा सम्मान हासिल कर चुकी हैं पुतली

पुतली गंझू को अब तक 45 से अधिक पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से लाइफटाइम कंट्रीब्यूशन अवार्ड भी दिया गया है। बताया जाता है कि झारखंड में यह सम्मान पाने वाली वह एकमात्र सोहराय कलाकार हैं।

पुतली ने अपने निरंतर प्रयासों के जरिए हजारीबाग की सदियों पुरानी सोहराय परंपरा को व्यापक पहचान दिलाई है। उनकी कला में प्रकृति, पशु-पक्षियों और स्थानीय जीवन की झलक देखने को मिलती है।

मां से सीखी सोहराय चित्रकला

पुतली गंझू के मुताबिक सोहराय कला का पहला प्रशिक्षण उन्हें अपनी मां से मिला। बचपन में वह जंगल और आसपास के प्राकृतिक वातावरण से प्रेरणा लेकर दीवारों पर पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों की आकृतियां बनाया करती थीं।

शुरुआत में परिवार की ओर से उन्हें इस काम को लेकर विरोध का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी रुचि और मेहनत नहीं छोड़ी। धीरे-धीरे यही कला उनकी पहचान बन गई और उन्होंने इसे बड़े मंचों तक पहुंचाने का प्रयास जारी रखा।

कनाडा से ऑस्ट्रेलिया तक पहुंची सोहराय कला

सोहराय कला से जुड़े गुस्ताव इमाम के अनुसार, पुतली गंझू ने कई देशों में जाकर हजारीबाग की पारंपरिक चित्रकला को प्रस्तुत किया है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और इटली समेत विभिन्न देशों में उनकी कला को मंच मिला है।

उनका कहना है कि आदिवासी समुदाय की पारंपरिक कला और संस्कृति भारत की विशिष्ट पहचान का हिस्सा है। चित्रकला के साथ-साथ आदिवासी समाज की भाषा, पहनावा, खान-पान, जीवनशैली और रीति-रिवाज भी देश की सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध करते हैं।

सम्मान से बढ़ा कलाकारों का उत्साह

समारोह में पुतली गंझू के योगदान की सराहना करते हुए हजारीबाग की उप विकास आयुक्त रिया सिंह ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने देश के सामाजिक और विकासात्मक सफर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उनके योगदान को सम्मान के साथ याद किया जाना चाहिए।

विश्व आदिवासी दिवस पर मिला यह सम्मान न केवल पुतली गंझू के व्यक्तिगत योगदान की पहचान है, बल्कि हजारीबाग की पारंपरिक सोहराय कला और उससे जुड़े कलाकारों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्थानीय लोककला को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

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