Friday, April 17, 2026

वित्त वर्ष 2026 में भारत का कुल निर्यात $860 अरब के ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर पहुंचा.

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नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत का कुल निर्यात (वस्तु और सेवाएं) 860.09 अरब डॉलर के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले वित्त वर्ष (FY25) के 825.26 अरब डॉलर की तुलना में 4.22% की वृद्धि दर्शाता है.

मार्च में दिखा जबरदस्त उछाल
वित्त वर्ष के समापन महीने यानी मार्च 2026 में निर्यात गतिविधियों में भारी तेजी देखी गई. मार्च में वस्तु निर्यात 38.92 अरब डॉलर रहा, जो पूरे साल का सबसे अधिक मासिक आंकड़ा है. इस साल की अंतिम तिमाही में आई तेजी ने भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद इस रिकॉर्ड स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

निर्यात के मुख्य स्तंभ: पेट्रोलियम और इंजीनियरिंग गुड्स
इस ऐतिहासिक वृद्धि के पीछे पेट्रोलियम उत्पादों और इंजीनियरिंग सामानों का सबसे बड़ा हाथ रहा. भारत की मजबूत रिफाइनिंग क्षमता और वैश्विक बाजार में ईंधन की निरंतर मांग के कारण पेट्रोलियम क्षेत्र शीर्ष पर रहा. वहीं, इंजीनियरिंग गुड्स—जिसमें मशीनरी, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और औद्योगिक उपकरण शामिल हैं—ने मार्च में 10.94 अरब डॉलर का योगदान दिया.

विविधता और मजबूती
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का निर्यात केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहा. खनिज और अयस्क (Mica, Coal & Ores) के क्षेत्र में 11.27% की वृद्धि दर्ज की गई, जो मार्च में 0.58 अरब डॉलर तक पहुँच गई. इसके अतिरिक्त, अन्य अनाज और हस्तशिल्प जैसे कृषि और पारंपरिक क्षेत्रों ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया, जो भारत की निर्यात टोकरी की विविधता को दर्शाता है.

सेवा क्षेत्र का दबदबा
हालांकि वस्तु निर्यात में 0.53% की मामूली वृद्धि हुई, लेकिन कुल आंकड़े को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का श्रेय सेवा क्षेत्र को जाता है. सूचना प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक सेवाओं के दम पर सेवा निर्यात पहली बार 410 अरब डॉलर के पार जाने का अनुमान है.

मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि पेट्रोलियम, इंजीनियरिंग और खनिज जैसे क्षेत्रों की मजबूती भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति को और सशक्त बना रही है. वैश्विक चुनौतियों और बदलती आपूर्ति श्रृंखलाओं के बीच, $860 अरब का यह आंकड़ा भारतीय उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता और ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता का प्रमाण है.

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