Monday, March 16, 2026

वित्त मंत्रालय ने आईपीओ लाने वाली कंपनियों के लिए सार्वजनिक निर्गम नियमों में संशोधन किया

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नई दिल्ली : वित्त मंत्रालय ने शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों के न्यूनतम सार्वजनिक निर्गम से संबंधित नियमों में संशोधन किया है और इसे निर्गम के बाद की पूंजी से जोड़ दिया है.

इस महीने की 13 तारीख को अधिसूचित प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 के अनुसार, जिन कंपनियों की निर्गम के बाद की पूंजी 1,600 करोड़ रुपये से अधिक और 5,000 करोड़ रुपये से कम है, उन्हें सूचीबद्ध होने के तीन साल के भीतर अपनी सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाकर कम से कम 25 प्रतिशत करनी होगी. ऐसा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा तय तरीके से किया जाएगा.

नियमों में आगे कहा गया है कि निर्गम के बाद की सीमा चाहे कुछ भी हो, सूचीबद्ध होने के समय प्रतिभूतियों के प्रत्येक वर्ग का कम से कम 2.5 प्रतिशत हिस्सा सार्वजनिक रूप से पेश किया जाना चाहिए.

संशोधन के अनुसार, यदि किसी कंपनी के निर्गम के बाद उसकी पूंजी 1,600 करोड़ रुपये तक है, तो कंपनी द्वारा जारी किए गए प्रत्येक वर्ग के इक्विटी शेयरों या परिवर्तनीय ऋण पत्र का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा सार्वजनिक रूप से पेश करना अनिवार्य होगा.

अगर यह पूंजी 1,600 करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 4,000 करोड़ रुपये से कम है, तो कंपनी को 4,000 करोड़ रुपये के बराबर शेयर पेश करने होंगे. जिन कंपनियों की निर्गम के बाद की पूंजी 4,000 करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 5,000 करोड़ रुपये के बराबर या उससे कम है, उनके लिए सार्वजनिक पेशकश कंपनी द्वारा जारी इक्विटी शेयरों या परिवर्तनीय ऋण पत्र के प्रत्येक वर्ग का कम से कम 10 करोड़ होना चाहिए.

वहीं, 5,000 करोड़ रुपये से अधिक लेकिन एक लाख करोड़ रुपये से कम या उसके बराबर की पूंजी वाली कंपनियों को 1,000 करोड़ रुपये के बराबर शेयर और प्रत्येक वर्ग के कम से कम आठ प्रतिशत शेयर जनता को देने होंगे. इन कंपनियों को सूचीबद्ध होने के पांच साल के भीतर अपनी सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाकर कम से कम 25 प्रतिशत करनी होगी.

इसी तरह निर्गम के बाद पांच लाख रुपये से अधिक की पूंजी वाली कंपनी को कम से कम 1,500 करोड़ रुपये के शेयरों के बराबर और उनके द्वारा जारी किए जाने वाले प्रत्येक वर्ग के शेयरों या परिवर्तनीय डिबेंचर के कम से कम एक प्रतिशत बराबर शेयर जारी करने होंगे. ये नियम पंजीकृत शेयर बाजारों को संशोधित नियमों के लागू होने से पहले के सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों के गैर-अनु़पालन के लिए जुर्माना लगाने की अनुमति देते हैं.

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