Monday, October 12, 2026

लोहरदगा के 15 शिक्षकों के तबादले पर हाईकोर्ट का निर्देश, अभ्यावेदन पर फैसला होने तक 2023 का आदेश लागू नहीं होगा

Share

रांची/लोहरदगा, झारखंड | 12 अक्टूबर 2026

झारखंड के लोहरदगा जिले में 15 शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने लोहरदगा के उपायुक्त (डीसी) को शिक्षकों की याचिका को संयुक्त अभ्यावेदन मानकर कानून और लागू नियमों के अनुसार उचित निर्णय लेने को कहा है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक संयुक्त अभ्यावेदन पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक वर्ष 2023 का स्थानांतरण आदेश लागू नहीं किया जाएगा, बशर्ते वह आदेश अब तक लागू नहीं हुआ हो। इस निर्देश से संबंधित शिक्षकों के मामले में प्रशासनिक निर्णय का इंतजार बढ़ गया है।

क्या है लोहरदगा के 15 शिक्षकों के तबादले का मामला?

मामला लोहरदगा जिले के 15 शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़ा है। शिक्षकों की ओर से अदालत को बताया गया कि जिला शिक्षा अधीक्षक ने 27 जुलाई 2023 को एक पत्र जारी किया था। इसमें संबंधित शिक्षकों को अलग-अलग विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षक बताते हुए दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया था।

शिक्षकों का कहना है कि आदेश जारी होने के करीब तीन साल बाद भी इसे लागू नहीं किया गया है। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर स्थानांतरण आदेश को रद्द करने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने उपायुक्त को क्या निर्देश दिया?

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले में सीधे स्थानांतरण आदेश रद्द करने के बजाय शिक्षकों की याचिका को संयुक्त अभ्यावेदन के रूप में संबंधित प्रशासनिक अधिकारी के समक्ष विचार करने का निर्देश दिया।

अदालत के निर्देश के अनुसार, लोहरदगा के उपायुक्त को शिक्षकों की बात पर विचार करते हुए कानून और लागू नियमों के अनुरूप उचित निर्णय लेना होगा।

इसका अर्थ है कि शिक्षकों की मांग पर प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जाएगा। हालांकि, अदालत ने अभ्यावेदन पर अंतिम निर्णय क्या होना चाहिए, यह तय नहीं किया है।

अभ्यावेदन पर फैसले तक स्थानांतरण आदेश लागू नहीं होगा

इस मामले में हाईकोर्ट ने वर्ष 2023 के स्थानांतरण आदेश को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। अदालत के मुताबिक, जब तक संयुक्त अभ्यावेदन पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक संबंधित स्थानांतरण आदेश लागू नहीं किया जाएगा, यदि उसे अब तक लागू नहीं किया गया है।

यह निर्देश महत्वपूर्ण है, क्योंकि शिक्षकों की ओर से अदालत में कहा गया था कि आदेश जारी होने के बावजूद लंबे समय से उसका क्रियान्वयन नहीं हुआ है।

हालांकि, इस आदेश को शिक्षकों के स्थानांतरण विवाद का अंतिम निपटारा नहीं माना जा सकता। अंतिम स्थिति उपायुक्त के निर्णय और मामले से जुड़े आगे के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।

शिक्षकों ने स्थानांतरण प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान शिक्षकों की ओर से सरकारी विद्यालयों में स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया में निजी व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।

शिक्षकों के पक्ष से कहा गया कि संबंधित आदेश को लंबे समय से लागू नहीं किया गया है। ऐसे में याचिका को अभ्यावेदन मानकर अधिकारियों को नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश देना न्यायहित में उचित होगा।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से भी कहा गया कि शिक्षक संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं।

अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब लोहरदगा के उपायुक्त को शिक्षकों के संयुक्त अभ्यावेदन पर विचार कर उचित निर्णय लेना होगा। इस प्रक्रिया में संबंधित तथ्यों, लागू नियमों और शिक्षकों की ओर से रखे गए पक्ष पर विचार किया जाना है।

फिलहाल अदालत के निर्देश से अभ्यावेदन पर प्रशासनिक निर्णय का रास्ता खुला है। शिक्षकों के स्थानांतरण पर अंतिम स्थिति उपायुक्त के फैसले से स्पष्ट होगी।

BHARAT SUPERFAST NEWS

Read more

Local News