Monday, March 30, 2026

लोकसभा ने IBC विधेयक, 2025 पारित किया,अब डिफ़ॉल्ट साबित होने पर 14 दिनों में दिवाला आवेदन स्वीकार करना अनिवार्य होगा और देरी पर जुर्माना लगेगा.

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नई दिल्ली: भारतीय कॉर्पोरेट जगत और बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक बड़े सुधार के रूप में, लोकसभा ने सोमवार, 30 मार्च को ‘दिवाला और दिवालियापन संहिता विधेयक, 2025’ को मंजूरी दे दी है. इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य दिवाला समाधान प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को समाप्त करना और संकटग्रस्त कंपनियों के मूल्य को सुरक्षित रखना है.

14 दिनों की अनिवार्य समयसीमा
इस संशोधन की सबसे बड़ी विशेषता 14 दिनों की समयसीमा है. अब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) को किसी कंपनी के डिफॉल्ट (चूक) साबित होने के बाद, दिवाला आवेदन स्वीकार करने के लिए केवल 14 दिन का समय मिलेगा. इससे पहले, प्रक्रियाओं में महीनों लग जाते थे, जिससे कंपनी की संपत्ति की वैल्यू कम हो जाती थी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि देरी का मुख्य कारण लंबी मुकदमेबाजी है, जिसे अब नए दंडात्मक प्रावधानों के जरिए नियंत्रित किया जाएगा.

समाधान, न कि केवल वसूली
विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने एक महत्वपूर्ण बिंदु रखा. उन्होंने कहा कि IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) का उद्देश्य केवल बैंकों का पैसा वसूलना (Debt Recovery) नहीं है, बल्कि संकट में फंसी “व्यवहार्य कंपनियों” को बचाना है. उन्होंने रेखांकित किया कि 2016 में लागू होने के बाद से IBC ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की सेहत सुधारने और कंपनियों में ‘क्रेडिट अनुशासन’ लाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है.

प्रक्रिया के दुरुपयोग पर लगेगा अंकुश
सदन में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि कई बार कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर समाधान में देरी की जाती है. नए विधेयक में ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए भारी जुर्माने का प्रावधान है. यदि कोई पक्ष जानबूझकर प्रक्रिया को बाधित करता है या तुच्छ याचिकाएं दायर करता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

चयन समिति की सिफारिशों का समावेश
यह विधेयक पहले एक चयन समिति को भेजा गया था. लोकसभा में पारित वर्तमान संस्करण में समिति के उन सुझावों को शामिल किया गया है जो व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट दिवालियापन के मामलों को अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाते हैं.

निष्कर्ष और भविष्य की राह
लोकसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राज्यसभा में जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इन 12 प्रमुख संशोधनों से भारत में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार करने की सुगमता) को बढ़ावा मिलेगा. इससे न केवल बैंकों का फंसा हुआ कर्ज (NPA) कम होगा, बल्कि संकटग्रस्त कंपनियों के कर्मचारियों और अन्य हितधारकों के हितों की भी रक्षा होगी.

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