Monday, August 10, 2026

लोअर या निल TDS सर्टिफिकेट के लिए जल्द शुरू होगी ऑनलाइन सुविधा, टैक्सपेयर्स को मिलेगी राहत.

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नई दिल्ली: आयकरदाताओं के लिए जल्द ही लोअर या निल TDS सर्टिफिकेट हासिल करने की प्रक्रिया आसान होने वाली है। केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि आयकर विभाग इस सुविधा के लिए ऑनलाइन और पेपरलेस आवेदन व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। इससे करदाताओं को आवेदन के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने और कागजी दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम हो सकती है।

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में लिखित जवाब में इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्त अधिनियम, 2026 के जरिए आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 395(1) में बदलाव किया गया है। इसके बाद कम दर या शून्य दर पर TDS कटौती के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आवेदन का प्रावधान किया गया है। इस व्यवस्था को लागू करने वाले नियम तैयार किए जा रहे हैं।

क्या होता है लोअर या निल TDS सर्टिफिकेट?

यदि किसी करदाता को लगता है कि उसकी वास्तविक कर देनदारी की तुलना में अधिक TDS काटा जा रहा है, तो वह कम दर से या शून्य दर पर TDS कटौती के लिए प्रमाणपत्र की मांग कर सकता है। प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था के लागू होने के बाद इस प्रक्रिया को ऑनलाइन पूरा करना संभव होगा।

पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी से होगी जांच

नई व्यवस्था में आवेदन की प्रक्रिया को डेटा आधारित बनाने की तैयारी है। आयकर विभाग ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध करदाता की जानकारी का इस्तेमाल आवेदन की जांच के लिए कर सकता है। इसमें पिछले वर्षों के आयकर रिटर्न, AIS, TIS और Form 26AS जैसे रिकॉर्ड शामिल होंगे।

इससे करदाताओं को अलग-अलग दस्तावेज जुटाकर जमा करने की आवश्यकता कम हो सकती है। पात्रता पूरी होने पर सर्टिफिकेट इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जारी किया जा सकेगा। वहीं, उपलब्ध आंकड़ों में अंतर या आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होने की स्थिति में आवेदन को ऑनलाइन ही अस्वीकार किया जा सकता है।

फेसलेस व्यवस्था पर भी सरकार का जोर

वित्त राज्य मंत्री ने संसद में आयकर विभाग के कामकाज से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उनके मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में विभाग ने करीब 2.24 लाख कर अपीलों का निपटारा किया। यह संख्या वित्त वर्ष 2023-24 में निपटाई गई 1.11 लाख अपीलों से काफी अधिक है।

इसी अवधि में करीब 2.13 लाख फेसलेस असेसमेंट भी पूरे किए गए। सरकार का कहना है कि डिजिटल और फेसलेस प्रक्रियाओं के विस्तार से कर प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ करदाताओं के अनुपालन संबंधी बोझ को कम करने में मदद मिल सकती है।

लोअर या निल TDS सर्टिफिकेट की ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद खास तौर पर उन करदाताओं को सुविधा मिलने की उम्मीद है, जिनकी अनुमानित कर देनदारी के मुकाबले स्रोत पर अधिक कर कटौती हो रही है।

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