मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक मंगलवार को शुरुआती कारोबार में लाल निशान में रहे. कमजोर वैश्विक संकेतों, वॉल स्ट्रीट पर टेक शेयरों में बिकवाली और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार निकासी के चलते बाजार पर दबाव देखने को मिला.
शुरुआती कारोबार में बाजार की चाल
सुबह करीब 9.30 बजे, बीएसई सेंसेक्स 115 अंकों या 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84,579 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. वहीं, एनएसई निफ्टी 30 अंक या 0.12 प्रतिशत फिसलकर 25,911 पर आ गया. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की कमजोरी देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप 100 में 0.03 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.08 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे कमजोर रहा, जिसमें 0.18 प्रतिशत की गिरावट आई. इसके बाद निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 0.13 प्रतिशत टूट गया. अन्य सेक्टरों में भी सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिला.
तकनीकी स्तर और बाजार का रुख
विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 25,850–25,900 के दायरे में है, जबकि 26,150–26,200 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि साल के अंत में दिख रही कमजोरी किसी बड़े ट्रेंड बदलाव का संकेत नहीं देती. हालांकि, एडवांस-डिक्लाइन रेशियो गिरावट के पक्ष में रहा, जिसके कारण कम वॉल्यूम के बावजूद निफ्टी में सोमवार को करीब 100 अंकों की गिरावट आई.
नए साल में दिखेगी दिशा
विशेषज्ञों का कहना है कि नए साल की शुरुआत में जब बड़े संस्थागत निवेशक सक्रिय होंगे, तब बाजार को स्पष्ट दिशा मिल सकती है. फिलहाल निवेशकों को नए ट्रिगर्स और मजबूत संकेतों का इंतजार करना चाहिए.
ऑटो बिक्री आंकड़ों पर नजर
आने वाले दो दिनों में जारी होने वाले ऑटो बिक्री आंकड़े खपत में तेजी और आर्थिक विकास की स्थिरता को लेकर अहम संकेत दे सकते हैं.
वैश्विक बाजारों का असर
एशिया-पैसिफिक बाजारों में भी मिला-जुला रुख रहा. चीन का शंघाई इंडेक्स 0.1 प्रतिशत गिरा, जबकि शेनझेन 0.23 प्रतिशत चढ़ा. जापान का निक्केई 0.11 प्रतिशत नीचे रहा और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 0.47 प्रतिशत मजबूत हुआ.
अमेरिकी बाजार सोमवार को गिरावट के साथ बंद हुए, जहां नैस्डैक 0.5 प्रतिशत, एसएंडपी 500 0.35 प्रतिशत और डॉव जोन्स 0.51 प्रतिशत टूट गया.
FII-DII की गतिविधि
29 दिसंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 2,760 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,644 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला.


