भारतीय रेलवे, इंडियन आर्मी और एफसीआई में नौकरी दिलाने के नाम पर 2 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 4 सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है
रेलवे, आर्मी और एफसीआई समेत विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. बिष्टुपुर पुलिस ने इस गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. गिरोह का सरगना मनीष कुमार खुद को आर्मी और रेलवे का अधिकारी बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था. पुलिस ने इनके कब्जे से फर्जी आईडी कार्ड, बिना नंबर की कार, नकली मेडिकल रिपोर्ट, ज्वाइनिंग लेटर, डेबिट कार्ड, मोबाइल और अन्य दस्तावेज बरामद किये हैं.
मनीष कुमार है गिरोह का मास्टरमाइंड
गिरफ्तार आरोपियों में मनीष कुमार उर्फ अभय (बोकारो चास), दीपराज कुमार भट्टाचार्य (बोकारो कसमार), मंतोष कुमार महली (बोकारो बगियारी) और दिनेश कुमार (आसनसोल) शामिल हैं. एसएसपी किशोर कौशल ने बताया कि गिरोह का मास्टरमाइंड मनीष कुमार खुद को सेना और रेलवे का अधिकारी बताकर लोगों को ठगता था. उसने अपनी कार में भारतीय सेना का लोगो भी लगाया था, ताकि लोगों को भरोसे में लिया जा सके.
गिरोह की मदद करने वाले अन्य सदस्य
मंतोष कुमार महली : मनीष का सहयोगी था और खुद को आर्मी का जवान बताता था. वह मनीष का बॉडीगार्ड बनता था.
दीपराज कुमार
1भट्टाचार्य : रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से पैसे वसूलता था.
दिनेश कुमार : आसनसोल डीआरएम ऑफिस के पास स्थित अस्पताल में अभ्यर्थियों की फर्जी मेडिकल जांच कराकर रिपोर्ट तैयार करता था.
2 साल में 2 करोड़ की ठगी
पुलिस जांच में पता चला है कि वर्ष 2022 से अब तक गिरोह ने 1.5 से 2 करोड़ रुपए की ठगी की है. इनके बैंक खातों में लगातार संदिग्ध लेन-देन हो रहे थे, जानकारी मिलते ही पुलिस ने गिरोह पर शिकंजा कस दिया. गिरोह के सदस्य रेलवे, आर्मी, आरपीएफ और एफसीआई में नौकरी दिलाने का झांसा देकर भोले-भाले युवाओं से मोटी रकम ऐंठते थे.
नाम बदलकर करते थे ठगी, फर्जी मेडिकल और ट्रेनिंग भी करायी
गिरोह के सदस्य बार-बार अपना नाम और पहचान बदलकर ठगी करते थे. वे नौकरी के इच्छुक युवाओं से रुपए लेने के बाद उन्हें रेलवे, एफसीआई और अन्य सरकारी विभागों में भर्ती कराने का भरोसा देते थे. इसके लिए उन्हें
आसनसोल डीआरएम ऑफिस के पास स्थित एक अस्पताल ले जाया जाता और वहां उनका फर्जी मेडिकल कराया जाता था. व्हाट्सएप पर मेडिकल रिपोर्ट भी भेजी जाती थी.
इतना ही नहीं, गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों को रेलवे और एफसीआई के विभिन्न कार्यालयों में बिना किसी आधिकारिक जानकारी के कुछ दिनों तक ट्रेनिंग भी कराते थे, ताकि उन्हें शक न हो.
दिनेश की पत्नी भी जेल में
पुलिस जांच में पता चला कि आसनसोल से गिरफ्तार आरोपी दिनेश कुमार की पत्नी प्रीति अरोड़ा पहले से ही जालसाजी के एक अन्य मामले में जेल में है. दिनेश कुमार के खिलाफ भी आसनसोल में धोखाधड़ी का केस दर्ज है.
फर्जी दस्तावेज और अन्य सामान जब्त
- फर्जी इंडियन आर्मी आइडी कार्ड – 2
- बिना नंबर प्लेट की वैगनआर कार (आर्मी का लोगो लगा हुआ)
- इंडियन आर्मी का स्टाम्प – 2
- पिस्तौल (खिलौना)
- 60 नकली गोलियां
- आधार कार्ड, पैन कार्ड और डेबिट कार्ड – 3
- अभ्यर्थियों के मेडिकल पेपर और फर्जी ज्वाइनिंग लेटर
कैसे हुआ खुलासा?
इस गिरोह का पर्दाफाश एक ठगी के मामले की जांच के दौरान हुआ. आदित्यपुर रेलवे कॉलोनी निवासी सह रेलकर्मी राघव मछुवा उर्फ महेश मछुवा ने बिष्टुपुर थाना में 29 जून 2024 को मनीष कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था. राघव ने पुलिस को बताया कि जून 2023 में उनके साथी कमल किशोर पासवान ने भरोसा दिलाया था कि 5 लाख रुप देने पर बेटे को रेलवे में नौकरी लगा देगा. उन्होंने मनीष कुमार से गोपाल मैदान के पास मुलाकात की और 4 लाख रुपए दे दिये.
इसी तरह, अन्य दो अभ्यर्थियों तकबुल अंसारी और निजाम अंसारी से भी 10 और 7 लाख रुपए की ठगी की गयी थी. मनीष कुमार ने राघव मछुवा के बेटे को एक परीक्षा का रोल नंबर और पोस्टिंग पेपर भी दिया. इसके बाद उसने आसनसोल के गुप्ता लॉज में एक महीने तक रहने का निर्देश दिया, जिससे नौकरी का भ्रम बना रहे. जब आरोपी का मोबाइल बंद हो गया, तब राघव को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करायी.
एसआईटी की टीम ने किया गिरोह का भंडाफोड़
शिकायत के बाद सिटी एसपी के निर्देश पर डीएसपी (सीसीआर) मनोज ठाकुर की अगुवाई में एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनायी गयी. इसमें बिष्टुपुर थाना प्रभारी उमेश ठाकुर और अन्य अधिकारी शामिल थे. टेक्निकल सर्विलांस और गहन जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया.
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
पुलिस को शक है कि गिरोह के और कई सदस्य कई जिलों और राज्यों में सक्रिय हैं. उनकी तलाश की जा रही है. इसके अलावा, लखनऊ स्थित आर्मी हेडक्वार्टर से भी इस गिरोह की जांच करायी गयी, जिसमें इनके आईडी कार्ड फर्जी पाये गये.
क्या करें, ताकि ठगी का शिकार न हों?
सरकारी नौकरी की भर्ती केवल सरकारी वेबसाइटों के जरिये होती है. किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें. अगर कोई जानकारी लेनी हो, तो संबंधित विभाग की साइट को एक बार जरूर चेक कर लें. शक हो, तो संबंधित व्यक्ति की सूचना पुलिस को दें. यदि कोई व्यक्ति नौकरी दिलाने के नाम पर रुपए मांगता है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें. किसी भी फर्जी कॉल या दस्तावेज़ से सावधान रहें और पहले उसका वेरिफिकेशन करें.