भारत की बड़ी फिनटेक कंपनियों में से एक, रेजरपे अब शेयर बाजार में कदम रखने जा रही है. कंपनी ने अपने IPO के लिए बाजार नियामक सेबी के पास कॉन्फिडेंशियल तरीके से शुरुआती दस्तावेज जमा कर दिए हैं. जानकारों के मुताबिक, यह आईपीओ ₹5,000 करोड़ से ₹6,000 करोड़ के बीच का हो सकता है. शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद इस कंपनी की कुल वैल्यूएशन ₹50,000 करोड़ से ₹60,000 करोड़ तक पहुंच सकती है
‘रिवर्स फ्लिप’ से भारत लौटी कंपनी
रेजरपे पिछले कुछ सालों से भारतीय बाजार में लिस्ट होने की कोशिश कर रही थी. इसके लिए कंपनी ने साल 2025 में अपनी मुख्य कंपनी का मुख्यालय अमेरिका से भारत शिफ्ट किया. स्टार्टअप सेक्टर में इस प्रक्रिया को ‘रिवर्स फ्लिप’ कहा जाता है. कंपनी ने इस काम की शुरुआत मई 2023 में ही कर दी थी, ताकि भारतीय नियमों के तहत आईपीओ लाया जा सके.
क्या है कॉन्फिडेंशियल DRHP फाइलिंग?
इस नियम के तहत कंपनियां अपने वित्तीय और बिजनेस से जुड़े दस्तावेज सेबी के पास जमा तो करती हैं, लेकिन उन्हें तुरंत आम जनता के लिए सार्वजनिक नहीं किया जाता. इससे कंपनियों का जरूरी और संवेदनशील डेटा प्रतिस्पर्धी कंपनियों से सुरक्षित रहता है. आईपीओ आने के ठीक पहले ही इन दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाता है. हाल ही में कई बड़े स्टार्टअप्स ने इसी रास्ते को चुना है.
बड़े निवेशकों का भरोसा
रेजरपे को दुनिया के कई दिग्गज निवेशकों का साथ मिला हुआ है. इनमें पीक एक्सवी पार्टनर्स, टाइगर ग्लोबल, रिबिट कैपिटल, मैट्रिक्स पार्टनर्स और लाइटस्पीड वेंचर पार्टनर्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं. वित्त वर्ष 2025 में कंपनी की कमाई 65% बढ़कर ₹3,783 करोड़ रही है.
फोनपे ने टाला अपना आईपीओ
रेजरपे का यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब उसकी विरोधी कंपनी फोनपे ने बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव के कारण अपना आईपीओ फिलहाल टाल दिया है. फोनपे करीब $1.5 बिलियन जुटाने की तैयारी में थी. ऐसे में रेजरपे की यह शुरुआत भारतीय डिजिटल पेमेंट्स और फिनटेक सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी साबित हो सकती है.


