Thursday, March 26, 2026

रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर विवाह स्थल बन रहा है, मंदिर में श्रीकृष्ण के पोते और बाणासुर की पुत्री उषा का विवाह हुआ था.

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देवउठनी एकादशी के बाद शादियों का सीजन फिर से शुरू हो गया है. देश में शादियों की धूम है. ऐसे में नवयुगल अपनी शादी के खास पलों को यादगार बनाने के लिए नए-नए तरीके भी अपना रहे हैं. बीते कुछ वक्त में देखा भी गया है कि कई जोड़े शादी के सात फेरे किसी खास स्थान पर लेने की तैयारी भी करते हैं. जो इन दिनों काफी चलन में है. उत्तराखंड में भी कई ऐसे स्थान हैं, जो WEDDING DESTINATION के रूप में पहली पसंद बन रहे हैं.

सबसे पहले जिस स्थान का नाम सामने आता है वो है त्रियुगीनारायण (त्रिजुगीनारायण) धाम. उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह स्थल त्रियुगीनारायण मंदिर उत्तराखंड में खास WEDDING DESTINATION में से एक है. मंदिर में हर साल कई शादियां संपन्न होती हैं. देवभूमि का ये धाम नवयुगलों और उनके परिवार के लिए शिव-पार्वती के अखंड आशीर्वाद का प्रतीक भी है.

Omkareshwar Temple

वहीं, रुद्रप्रयाग जिले में ही एक और ऐसा ही स्थान है जिसकी कहानी प्रेम की एक अनूठी मिसाल से जुड़ी है. ये पौराणिक स्थान रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ में है. दरअसल, अपनी धार्मिक आस्था के लिए देश दुनिया में प्रसिद्ध ऊखीमठ धाम भगवान केदारनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल के रूप में जाना जाता है. केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद भगवान केदार ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में विराजते हैं.

पुराणों में प्रचलित कथा के अनुसार ऊखीमठ का ओंकारेश्वर मंदिर वही स्थान है, जहां भगवान कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध और बाणासुर की पुत्री ऊषा का विवाह हुआ था. पौराणिक जुड़ाव और बाबा केदारनाथ की धार्मिक महिमा के जरिए आज साल में कई जोड़े इस धार्मिक स्थान पर शादी के बंधन में बंध रहे हैं. हालांकि, आज भी बहुत कम लोग इस मंदिर के महत्व को इस कथा के रूप में जानते हैं.

परंपरा और पौराणिक आख्यानों के अनुसार, ऊषा और अनिरुद्ध की प्रेम कथा इसी इलाके से जुड़ी हुई मानी जाती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ओंकारेश्वर मंदिर ऊषा और अनिरुद्ध के विवाह स्थल के लिए भी प्रसिद्ध है.

मंदिर परिसर में स्थित कोठा भवन में ही बाणासुर की पुत्री ऊषा और भगवान श्री कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध का विवाह संपन्न हुआ था. ओंकारेश्वर मंदिर में कई अन्य मंदिरों का समूह मौजूद है.
– आशुतोष डिमरी, बदरीनाथ धाम के पुजारी –

आशुतोष डिमरी बताते हैं कि, इसी वजह से इस क्षेत्र का नाम पहले ऊषा मैत (मायका) और बाद में परिवर्तित होकर अब पूरे क्षेत्र को ऊखीमठ नाम से जाना जाता है. आज मंदिर के भीतर पौराणिक काल की कई स्मृतियां मौजूद हैं. इक्ष्वाकु वंश के एक प्रतापी राजा मांधाता की मूर्ति भी है, जिन्होंने इसी स्थान पर भगवान शिव की 12 साल तक तपस्या की थी और ओंकारेश्वर रूप में उन्हें भगवन ने दर्शन दिए थे. इसलिए भी मंदिर को ओंकारेश्वर मंदिर कहा जाता है.

Omkareshwar Temple

ओंकारेश्वर मंदिर और शीतकालीन गद्दी का महत्वऊखीमठ में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर, मुख्य देवस्थान है.ऊखीमठ को बाबा केदार का शीतकालीन गद्दीस्थल कहा जाता है.शीतकाल के दौरान केदारनाथ धाम 6 माह के लिए बंद रहता है.शीतकाल में भगवान केदारनाथ की मूर्ति को ऊखीमठ में लाकर स्थापित किया जाता है.यहीं बाबा केदार की पूजा-अर्चना संचालित होती है.यह दुनिया में एकमात्र मंदिर है, जो कोटा शैली में बना हुआ है.इस मंदिर के गर्भ गृह में बाहर से 16 कोने और अंदर से 8 कोने देखने को मिलते हैं.ये मंदिर समुद्र तल से लगभग 3 हजार 301 फीट की ऊंचाई पर स्थित है.

विवाह के लिए बढ़ रही लोकप्रियता: पुजारी आशुतोष डिमरी का कहना है कि कुछ सालों में इस मंदिर में भी शादी करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है. पौराणिक वैवाहिक स्मृति, ऊषा-अनिरुद्ध की कथा का जुड़ना और शुभ स्वरूप जोड़ों को इस स्थान की ओर आकर्षित करता है. इसके साथ ही आध्यात्मिक वातावरण, केदारनाथ से जुड़ी आध्यात्मिक महिमा विवाह को धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व देती है.

Omkareshwar Temple

खास बात है कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से क्षेत्र में यात्रा व्यवस्थाएं भी धीरे-धीरे सुधर रही हैं. नतीजा देश के विभिन्न हिस्सों से नव युगल यहां विवाह के लिए आने लगे हैं. लिहाजा शिव-पार्वती के विवाह स्थल त्रियुगीनारायण के बाद ऊखीमठ भी विवाह स्थल बनने की ओर बढ़ रहा है.
– आशुतोष डिमरी, बदरीनाथ धाम के पुजारी –

मंडप और मंदिर का धार्मिक-वास्तुशिल्प स्वरूप: ओंकारेश्वर मंदिर में पहाड़ी क्षेत्र की पारंपरिक वास्तुशिल्प झलकती है. मंदिर का निर्माण मुख्यतया स्थानीय पत्थर और लकड़ी से हुआ है. गर्भगृह, शिखर और स्तंभों पर पारंपरिक नक्काशी दिखाई देती है. मंदिर के आंगन में बने खुले मंडप, विवाह और सामुदायिक अनुष्ठानों के लिए काफी बड़े हैं. मंडपों में पारंपरिक हिंदू रीति रिवाजों के अनुसार वैदिक या धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जा सकते हैं.

Omkareshwar Temple

मंदिर समिति के अधीन ये मंदिर भी आते हैं. बीते कुछ सालों में त्रियुगीनारायण मंदिर में शादी करने वालों की संख्या बढ़ी है. वैसे ही ओंकारेश्वर मंदिर में भी लोग शादी के बंधन में बंधने आते हैं. मंदिर समिति यहां और सुविधा बढ़ा रही है. फिलहाल शीतकालीन यात्रा के मद्देनजर काफई व्यवस्थाएं ठीक की गई हैं. सरकार सभी धार्मिक स्थलों का विकास कर रही है. ओंकारेश्वर भी उनमें से एक है.
– हेमंत द्विवेदी, अध्यक्ष, बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति –

यहां कैसे पहुंचे: ऊखीमठ मंदिर, रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है. रुद्रप्रयाग मुख्यालय से ऊखीमठ की दूरी लगभग 45 किलोमीटर है. मार्ग और मौसम के आधार पर परिवर्तन संभव है. पहाड़ी मार्ग होने के कारण यात्रा का समय सड़क की स्थिति पर निर्भर करता है. वहीं नजदीकी रेलवे स्टेशन योग नगरी ऋषिकेश है. जबकि नजदीकी हवाई अड्डा जौलीग्रांट है. यहां से निजी वाहन से भी ऊखीमठ तक पहुंचा जा सकता है.

Omkareshwar Temple

सुविधाएं और स्थानीय व्यवस्थाएं: मध्यम श्रेणी के विवाह और पारंपरिक अनुष्ठानों के आयोजन के लिए स्थानीय होटल, धर्मशालाएं और आयोजन स्थल उपलब्ध हैं. बड़े पैमाने के आधुनिक समारोहों के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाओं की आवश्यकता होती है, जिन्हें देहरादून, ऋषिकेश से मंगाया जा सकता है. बहरहाल, ऊखीमठ धार्मिक आस्था और पौराणिक स्मृतियों का अनूठा मिश्रण है. जहां एक ओर केदारनाथ की शीतकालीन गद्दी की उपस्थिति इसे तीर्थयात्रियों के लिए आवश्यक पड़ाव बनाती है वहीं उषा अनिरुद्ध की पौराणिक कथा इस स्थान को विवाह स्थल के लिए एक आध्यात्मिक रूप से समृद्ध विकल्प बनाती है

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