राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने सरकारी स्कूलों के कक्षा 6-8 के शिक्षकों के लिए विज्ञान और गणित पढ़ाने हेतु एक प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग हैंडबुक तैयार की है। जाएगा।
पटना। सरकारी स्कूलों में कक्षा छह, सात और आठ के विद्यार्थियों को विज्ञान व गणित विषय समझने में परेशानी नहीं हो इसके लिए राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने एक पुस्तक की है। पुस्तक विशेषकर विज्ञान व गणित के शिक्षकाें के लिए है।
इस पुस्तक में दिए पाठ्यक्रम के अनुसार ही शिक्षक बच्चों को पढाएंगे। शिक्षकों के लिए तैयार किए गए प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग हस्त-पुस्तिका सभी स्कूलों को उपलब्ध करा दी गई है।
स्कूल पुस्तक को पहुंचाने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा पदाधिकारी को दी गई है। यह पुस्तक पूरी तरह एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर आधारित है। जिसे पढ़कर विद्यार्थी आसानी से विज्ञान विषय को समझ सकते हैं।
जून से फरवरी 2026 तक पुरा करना पाठ्यक्रम
सरकारी स्कूलों में अभी गर्मी की छुट्टी चल रही है। 22 जून को सभी सरकारी स्कूल खुल जाएंगे। स्कूल खुलते ही इस पुस्तक के माध्यम से विज्ञान की पढ़ाई प्रारंभ कर दी जाएगी।
फरवरी 2026 तक पुस्तक में दिए गए पाठ्यक्रम को पूरा कर लेना है। पुस्तक में दिए गए विषय या इससे संबंधित वीडियो एससीईआरटी के यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से अपलोड किया जा सकेगा।
जनवरी से फरवरी के बीच तीन होगी अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी
एससीईआरटी के अनुसार कक्षा विज्ञान एवं गणित के प्रत्येक तीन प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के बाद विद्यालय में प्रतिमाह होने वाले अभिभावक -शिक्षक संगोष्ठी में प्रोजेक्ट की प्रदर्शनी का आयोजन होगा।
पाठ्यक्रम के अनुसार विज्ञान व गणित विषय पर जनवरी से फरवरी के बीच तीन बार अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी आयोजित होगी। संगोष्ठी के आयोजन के लिए दीक्षा पोर्टल पर माइक्रो इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट भेजा जाएगा।
प्रोजेक्ट से प्रधानाध्यापक, अभिभावक और शिक्षक कार्य योजना की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। संगोष्ठी में विज्ञान व गणित में बच्चों की उपलब्धि की चर्चा की जाएगी।
तैयार प्रोजेक्ट दीक्षा पोर्टल पर होगा अपलोड
प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (पीबीएल) पूरी नई शिक्षा नीति पर आधारित माईक्रो इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट (MIP) है। जिसके माध्यम से शिक्षक पीबीएल को कक्षा में प्रभावी रूप से वीडियो के साथ पाठयोजना तैयार करेंगे।
प्रत्येक एमआइपी पर कम से कम पांच दिन में प्रोजेक्ट तैयार कराएंगे। बच्चों द्वारा तैयार प्रोजेक्ट को दीक्षा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।


