Tuesday, January 27, 2026

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में सरकारी जमीन के दाखिल-खारिज में सुस्ती जारी है, केवल 22.86% मामले ही निपटाए गए हैं।

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राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में सरकारी जमीन के दाखिल-खारिज में सुस्ती जारी है, केवल 22.86% मामले ही निपटाए गए हैं। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है, क्योंकि यह लापरवाही औद्योगिक परियोजनाओं और राज्य के विकास को बाधित कर रही है। विभागीय सचिव जय सिंह ने भी चिंता जताई है और जिलाधिकारियों को लंबित मामलों को प्राथमिकता से निपटाने का निर्देश दिया

पटना। रोज-रोज के कड़े आदेश और सख्त कार्रवाई की धमकी के बावजूद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की सुस्ती कम नहीं हो पा रही है।

हाल यह है कि सरकारी जमीन का दाखिल-खारिज भी समय पर नहीं हो रहा है। इस मोर्चे पर विभाग की अब तक की उपलब्धि महज 22.86 प्रतिशत है।

उप मुख्यमंत्री सह भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस पर कड़ा रूख अपनाया है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन का समयबद्ध दाखिल-खारिज अत्यंत आवश्यक है। ताकि किसी निजी व्यक्ति के हाथ में यह न चली जाए।

इस दिशा में उठाए गए सख्त कदम सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शी राजस्व व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए हैं।

कई अंचलों में एक भी मामले का निष्पादन नहीं हुआ: जय सिंह

समय पर दाखिल-खारिज होने से औद्योगिक परियोजनाओं को गति मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और राज्य का तेज विकास संभव होगा। इस काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

विभागीय सचिव जय सिंह की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि सरकारी भूमि दाखिल-खारिज पोर्टल भी विकसित किया गया है।

इसके बावजूद राज्य स्तर पर सरकारी भूमि के दाखिल-खारिज वादों का औसत निष्पादन मात्र 22.86 प्रतिशत पाया गया है। यह अत्यंत चिंताजनक है।

कई अंचलों में सरकारी भूमि के दाखिल-खारिज का एक भी मामला निष्पादित नहीं किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अंचल स्तर पर इस कार्य के प्रति अपेक्षित गंभीरता एवं अभिरुचि नहीं ली जा रही है।

पत्र के साथ लंबित मामलों का जिलावार एवं अंचलवार विवरण भी संलग्न किया गया है। सचिव ने जिलाधिकारियों से अनुरोध किया कि वे अंचल अधिकारियों को निर्देश दें।

सरकारी भूमि के दाखिल-खारिज से जुड़े सभी लंबित का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।

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