रांचीः रांची विश्वविद्यालय के नीड-बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों के तबादले को लेकर जारी विवाद एक बड़े फैसले के साथ थम गया है. राजभवन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा था कि जब शिक्षकों की नियुक्ति विशुद्ध रूप से आवश्यकता आधारित थी, तो फिर उन्हें दूसरे कॉलेजों में स्थानांतरित क्यों किया गया? इस कड़े सवाल के बाद विश्वविद्यालय ने 23 नीड-बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों का तबादला रद्द कर दिया है और इन्हें वापस उनके मूल संस्थानों में भेजने का निर्देश जारी कर दिया है.
आरयू प्रशासन की ओर से जारी नई अधिसूचना में कहा गया है कि संशोधित आदेश 1 दिसंबर 2025 से प्रभावी होगा. यानी जिन शिक्षकों का ट्रांसफर हुआ था, उन्हें अपने मूल कॉलेज में जाकर योगदान देना होगा. आदेश जारी होने के तुरंत बाद विभिन्न कॉलेजों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. कई प्राचार्यों का कहना है कि रिवर्स ट्रांसफर से क्लासरूम मैनेजमेंट और परीक्षा संबंधी तैयारियां प्रभावित होंगी, क्योंकि वैकल्पिक व्यवस्था अभी तक नहीं की गई हैं.
तबादला रद्द होने के बाद कई कॉलेजों में विषयवार असंतुलन पैदा हो गया है. जिन कॉलेजों में पिछले तीन वर्षों से नीड-बेस्ड शिक्षक पढ़ा रहे थे, वे अकादमिक व्यवस्था में गहराई से जुड़ चुके थे. अब अचानक वापसी से कई विभाग पुनः शिक्षक विहीन हो जाएंगे. रांची, बेड़ो, बुंडू, लोहरदगा और सिमडेगा के कई कॉलेजों में भूगोल, अर्थशास्त्र, नागपुरी, उर्दू, कॉमर्स, भूविज्ञान, मानवशास्त्र जैसे विषयों के शिक्षकों की कमी हो जाएगी.
नई अधिसूचना में जिन शिक्षकों के तबादले रद्द किए गए हैं उनमें विभिन्न विषयों के असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल हैं. कुडुख, उर्दू, भूगोल, हिंदी, अंग्रेजी, कॉमर्स, नागपुरी, बंगला, जूलॉजी, भूविज्ञान, राजनीतिक विज्ञान और अर्थशास्त्र जैसे विषयों के कई शिक्षकों नाम इस सूची में हैं. इनमें से कुछ डोरंडा कॉलेज, आरएलएसवाई कॉलेज, रांची महिला कॉलेज, बीएस कॉलेज लोहरदगा, केसीबी कॉलेज बेड़ो, एसएस मेमोरियल कॉलेज, पीपीके कॉलेज बुंडू और मारवाड़ी कॉलेज में कार्यरत थे.
दिलचस्प बात यह है कि नोटिफिकेशन में कई विसंगतियां भी सामने आई हैं. कुछ शिक्षकों के तबादले निरस्त कर दिए गए हैं, जबकि कुछ नाम जिनका स्थानांतरण हुआ था, नोटिफिकेशन में शामिल ही नहीं हैं. कई स्थानों पर नीड-बेस्ड शिक्षकों को उनके मूल नियुक्ति स्थल के बजाय किसी अन्य कॉलेज में भेज दिए जाने का आरोप भी लग रहा है.
राजभवन की सख्ती और विश्वविद्यालय की चुनौती
राजभवन ने स्पष्ट कर दिया है कि नीड-बेस्ड नियुक्तियां लोड मैनेजमेंट और विषयवार आवश्यकता को ध्यान में रखकर की गई थीं. ऐसे में इन शिक्षकों को दूसरे संस्थानों में भेजना नीति के खिलाफ था. विश्वविद्यालय ने इस निर्देश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है, लेकिन अब चुनौती यह है कि जिन कॉलेजों में यह शिक्षक तीन साल से पढ़ा रहे थे, वहां की पढ़ाई बाधित होगी.
छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- कई विषयों में नियमित कक्षाएं प्रभावित होंगी.
- विभागीय गतिविधियां धीमी पड़ सकती हैं.
- परीक्षा की तैयारी और मूल्यांकन कार्य पर असर पड़ेगा.
- नए शिक्षकों की तैनाती में समय लग सकता है.
“राजभवन ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि नीड-बेस्ड नियुक्ति जिस कॉलेज की आवश्यकता के आधार पर की गई है, उन शिक्षकों को वहीं कार्य करना चाहिए. ऐसे में उनका अन्य कॉलेजों में स्थानांतरण नीति के अनुरूप नहीं था. राजभवन के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय ने सभी तबादले निरस्त करते हुए शिक्षकों को मूल संस्थान में भेजने का निर्णय लिया है.”-सुदेश कुमार साहू, डीएसडब्ल्यू , रांची विश्वविद्यालय

वहीं यूनिवर्सिटी प्रोफेसर यूनियन के डॉ. राजकुमार ने कहा कि “इस तरह के निर्णयों में बार-बार बदलाव होने से अनावश्यक परेशानियां खड़ी होती हैं और इसका सीधे तौर पर पठन–पाठन पर भी असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि राजभवन के निर्देश का पालन तो आवश्यक है, लेकिन ऐसे फैसलों को लागू करने से पहले उसकी पूर्ण तैयारी होनी चाहिए, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों.”
शैक्षणिक असंतुलन बड़ी चुनौती
बहरहाल, रांची विश्वविद्यालय का यह निर्णय नीड-बेस्ड नियुक्ति व्यवस्था को मूल स्वरूप देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, लेकिन ट्रांसफर रद्द होने से उत्पन्न शैक्षणिक असंतुलन भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ गई है. आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विश्वविद्यालय इन कमियों को कैसे दूर करता है और कॉलेजों में टीचर वैक्यूम को भरने के लिए क्या कदम उठाता है.


