रांची: रांची विश्वविद्यालय में लंबे समय से कार्यरत अस्थायी, संविदा और ग्रेड-III व ग्रेड-IV कर्मचारियों के भविष्य को लेकर टेक्निकल छात्र संघ ने चिंता जताई है। संघ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर दावा किया कि विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और वोकेशनल व सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों में काम कर रहे कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत लाने की प्रक्रिया चलने की आशंका है।
15 से 20 वर्षों से सेवा कर रहे कर्मचारियों का मुद्दा
टेक्निकल छात्र संघ के अनुसार, कई कर्मचारी 15 से 20 साल या उससे अधिक समय से विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं। संघ का कहना है कि लंबे समय से काम कर रहे इन कर्मचारियों के लिए इस उम्र में दूसरी नौकरी तलाशना आसान नहीं होगा।
संघ ने आशंका जताई कि यदि कर्मचारियों की नियुक्ति निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से की जाती है, तो उनकी नौकरी की स्थिरता और वेतन से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।
विश्वविद्यालय के कामकाज में कर्मचारियों की भूमिका का उल्लेख
संघ ने कहा कि ग्रेड-III और ग्रेड-IV कर्मचारी विश्वविद्यालय के रोजमर्रा के कई महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान देते हैं। परीक्षा फॉर्म से संबंधित काम, रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया और डेटा एंट्री जैसे कार्यों में भी उनकी भूमिका रहती है।
छात्र संघ ने कहा कि वर्षों के अनुभव वाले कर्मचारियों के योगदान को ध्यान में रखते हुए उनके भविष्य को सुरक्षित करने की जरूरत है।
नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग
टेक्निकल छात्र संघ ने लंबे समय से सेवा दे रहे अस्थायी और संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। संघ ने कहा कि कर्मचारियों की वरिष्ठता और अनुभव को ध्यान में रखते हुए उनके हित में कदम उठाए जाने चाहिए।
इसके साथ ही संघ ने कर्मचारियों को आउटसोर्स करने की कथित प्रक्रिया पर रोक लगाने और वर्षों से काम कर रहे कर्मियों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
कर्मचारी और छात्र संगठनों से एकजुट होने की अपील
संघ ने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर कर्मचारी और छात्र संगठनों को मिलकर आवाज उठाने की जरूरत है। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले पर स्पष्टता देने और लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की है।
