रांची: रांची विश्वविद्यालय ने पीएचडी कार्यक्रम को लेकर नई गाइडलाइन और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक 2026 सत्र से पीएचडी के लिए संशोधित नियम और प्रक्रियाएं लागू की जाएंगी।
नई व्यवस्था का उद्देश्य शोध कार्य की गुणवत्ता, प्रक्रिया में एकरूपता और निर्धारित अकादमिक मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
सभी विभागों और संबंधित कॉलेजों में लागू होंगे नियम
विश्वविद्यालय के नए पीएचडी नियम रांची विश्वविद्यालय के सभी विभागों के साथ-साथ उसके अधीन आने वाले अंगीभूत और संबद्ध महाविद्यालयों पर भी प्रभावी होंगे।
इसके तहत शोधार्थियों को डॉक्टोरल रिसर्च से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया और न्यूनतम मानकों का पालन करना होगा। शोध कार्य के संचालन से लेकर पीएचडी डिग्री प्रदान किए जाने तक संबंधित नियमों को लागू किया जाएगा।
NEP 2020 और UGC के प्रावधानों के अनुरूप तैयार नियम
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रावधानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। साथ ही इसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से 7 नवंबर 2022 को जारी पीएचडी से संबंधित न्यूनतम मानकों और प्रक्रिया संबंधी नियमों को आधार बनाया गया है।
नई अधिसूचना में डॉक्टोरल रिसर्च को लेवल-8 के प्रावधानों के तहत संचालित करने की बात कही गई है।
अधिसूचना जारी होते ही व्यवस्था प्रभावी
विश्वविद्यालय के अनुसार नई नियमावली अधिसूचना जारी होने की तारीख से प्रभावी मानी जाएगी। हालांकि इसका अनुपालन 2026 सत्र से आगे पीएचडी में शामिल होने वाले शोधार्थियों के लिए किया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित विभागों और संस्थानों को नई व्यवस्था की जानकारी भेज दी है।
विभागाध्यक्षों और कॉलेज प्राचार्यों को दी गई सूचना
रजिस्ट्रार की ओर से जारी सूचना विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्षों, अंगीभूत एवं संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों सहित संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गई है। इसमें रिसर्च निदेशक, IQAC निदेशक, विभिन्न संकायों के डीन और परीक्षा नियंत्रक भी शामिल हैं।
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि आगे पीएचडी से जुड़े शोध कार्य और डिग्री प्रदान करने की प्रक्रिया नई नियमावली के अनुसार ही संचालित की जाएगी। शोधार्थियों को निर्धारित अकादमिक मानकों और प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होगा।
