रांची | 31 अक्टूबर 2026 | Bharat Superfast News
झारखंड में स्वच्छ ऊर्जा और जैविक कचरे के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक नई पहल की तैयारी है। राजधानी रांची के सुकुरहुटू स्थित गोशाला परिसर में प्रतिदिन 20 टन क्षमता वाला बायो-CNG प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई गई है। रांची गोशाला न्यास की इस प्रस्तावित परियोजना पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इस संयंत्र में गोबर और अन्य जैविक कचरे का उपयोग करके बायो-CNG और जैविक खाद तैयार करने की योजना है। इससे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के साथ वैकल्पिक ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। न्यास के अनुसार, परियोजना का निर्माण वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
गोशाला परिसर में हुई परियोजना को लेकर बैठक
प्रस्तावित संयंत्र की स्थापना और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा के लिए रांची गोशाला न्यास परिसर में बैठक आयोजित की गई। इस दौरान सीएसआईआर, भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक, कॉमनवेल्थ फेलो और पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. पी. शन्मुगम ने बीआईटी मेसरा के प्रोफेसर राजीव के साथ गोशाला का दौरा किया।
दोनों विशेषज्ञों ने गोशाला में उपलब्ध संसाधनों और प्रस्तावित संयंत्र की संभावनाओं का जायजा लिया। बैठक में परियोजना की तकनीकी रूपरेखा और इसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पर विचार-विमर्श किया गया।
गोबर और जैविक कचरे से बनेगी स्वच्छ ऊर्जा
प्रस्तावित प्लांट में गोशाला से निकलने वाले गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। इन जैविक पदार्थों के प्रसंस्करण से बायो-CNG तैयार की जाएगी। इसके साथ ही प्रक्रिया के बाद प्राप्त जैविक खाद का उपयोग कृषि कार्यों में किया जा सकेगा।
इस परियोजना से गोशाला परिसर में जमा होने वाले जैविक कचरे का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकता है। साथ ही, स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद के उत्पादन से ऊर्जा तथा कृषि क्षेत्र को लाभ मिलने की संभावना है।
केंद्र सरकार भी वैकल्पिक ईंधन को दे रही बढ़ावा
बैठक में डॉ. पी. शन्मुगम ने कहा कि भारत सरकार स्वच्छ और टिकाऊ वैकल्पिक ईंधन के रूप में बायो-CNG को प्रोत्साहित कर रही है। ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए जैविक कचरे से ईंधन तैयार करने वाले संयंत्रों का महत्व बढ़ रहा है।
उन्होंने देश में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के लिए करीब 23 हजार करोड़ रुपये की योजना का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, ऐसे प्रयासों से उपलब्ध जैविक संसाधनों का उपयोग कर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
प्रतिदिन दो लाख रुपये की आय का अनुमान
परियोजना से जुड़े अनुमान के मुताबिक, संयंत्र के संचालन के बाद प्रतिदिन करीब दो लाख रुपये की आय हो सकती है। हालांकि, वास्तविक आय उत्पादन, संचालन लागत और तैयार बायो-CNG तथा जैविक खाद की बिक्री पर निर्भर करेगी।
करीब 20 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य गोशाला के जैविक अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलना है।
खेती में भी उपयोगी होगी तैयार जैविक खाद
बायो-CNG का इस्तेमाल वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जा सकता है। वहीं, संयंत्र से निकलने वाली जैविक खाद को खेती में उपयोग करने की योजना है।
इस तरह परियोजना से ऊर्जा उत्पादन के साथ कृषि क्षेत्र को भी लाभ पहुंचने की उम्मीद है। जैविक कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन होने से उसके खुले में जमा रहने और उससे होने वाली पर्यावरणीय समस्याओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
पहले कॉन्सेप्ट नोट, फिर तैयार होगी DPR
परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए आगे की प्रक्रिया भी तय की गई है। बैठक में निर्णय लिया गया कि सीएसआईआर की ओर से सबसे पहले परियोजना का कॉन्सेप्ट नोट तैयार किया जाएगा। इसमें संयंत्र की तकनीकी रूपरेखा और अन्य जरूरी पहलुओं को शामिल किया जाएगा।
इसके बाद रांची गोशाला न्यास की ओर से विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कराया जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
वर्ष 2027 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
रांची गोशाला न्यास ने प्रस्तावित बायो-CNG प्लांट का निर्माण वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। यदि योजना निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ती है, तो सुकुरहुटू में राज्य की पहली 20 टन प्रतिदिन क्षमता वाली ऐसी परियोजना स्थापित हो सकती है।
बैठक में रांची गोशाला न्यास के अध्यक्ष पुनीत कुमार पोद्दार, मंत्री प्रदीप राजगढ़िया, उपाध्यक्ष एसएन राजगढ़िया, कोषाध्यक्ष दीपक पोद्दार, सह सचिव सुरेश जैन, मनीष लोधा, अमित चौधरी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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