रांची: आने वाले दिनों में जब देश के साथ-साथ झारखंड में भी लोकसभा-विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन होना है, ऐसे में झारखंड में परिसीमन की वजह से अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व विधानसभा और लोकसभा सीटें न घटे, इसके लिए आगे की रणनीति बनाने के लिए राज्य के पूर्व शिक्षामंत्री एवं कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई.
बैठक में सहयोगी दल का भी कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा
प्रेस क्लब के सभागार में आयोजित होनेवाली ‘परिसीमन पर चर्चा’ के लिए बतौर संयोजक बंधु तिर्की ने छोटे-बड़े कुल 16-17 दलों को आमंत्रित किया था, लेकिन जब कार्यक्रम शुरू हुआ तो कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राजीव रंजन प्रसाद और सीपीआई माले के केंद्रीय समिति सदस्य शुभेंदु सेन, आरडी मांझी, स्टेट स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य देवीनंदन बेडिया, आदिवासी संघर्ष मोर्चा की केंद्रीय परिषद सदस्य सुशीला तिग्गा और कुछ अन्य सामाजिक संगठनों के नेता ही शामिल हुए.
बंधु तिर्की द्वारा आमंत्रित किये जाने के बावजूद भाजपा, आजसू, जदयू, लोजपा (आर) जैसे विरोधी दलों की बात छोड़िए, झारखंड मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय जनता दल, जैसे सत्ता के सहयोगी दल का भी कोई प्रतिनिधि सर्वदलीय बैठक में नहीं पहुंचा. विधायक जयराम महतो की पार्टी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का भी कोई प्रतिनिधि इस सर्वदलीय बैठक में नहीं पहुंचा.
सभी दलों को मीटिंग में आने का न्योता दिया गया थाः बंधु तिर्की
राज्य के ज्यादातर प्रमुख दलों की अनुपस्थिति में हुई बैठक के बाद पूर्व मंत्री और कांग्रेस के नेता बंधु तिर्की ने मीडिया से बातचीत में आगे की रणनीति और 02 अगस्त को रांची में ‘विशाल आदिवासी एकता रैली’ आयोजित करने की घोषणा की. बंधु तिर्की ने कहा कि परिसीमन का नुकसान राज्य के जनजातीय और दलित समाज को नहीं उठाना पड़े, इस लिहाज से यह आज का सबसे बड़ा मुद्दा है. कोई यह नहीं कहे कि हम इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अकेले आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए सभी दलों को न्योता दिया गया था. भाजपा-आजसू जैसे दल इसमें शामिल नहीं होंगे इसका पहले से अनुमान था. अब झामुमो के नेता क्यों नहीं आये, यह उनके नेताओं से पूछना होगा. राजद और जेएलकेएम का नाम लेकर कहा कि इन दलों से क्या ही उम्मीद की जा सकती है.
बंधु तिर्की द्वारा बुलाई गई थी सर्वदलीय बैठक
झारखंड में परिसीमन को लेकर प्रेस क्लब में सर्वदलीय बैठक हुई. हालांकि बैठक में कांग्रेस और भाकपा माले के साथ कई आदिवासी संगठनों ने हिस्सा लिया लेकिन दो राजनीतिक दलों को छोड़कर अन्य राजनीतिक दल के नेता या कोई प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल नहीं हुए.
बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि इस बैठक में परिसीमन के माध्यम से आदिवासी सीटों को कम करने की जो चाल चली जा रही है, उस पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि राज्य में तेजी से हुए डेमोग्राफी बदलाव पर भी चर्चा हुई. पूर्व मंत्री ने कहा कि अगर राज्य में परिसीमन के बाद आदिवासी-दलित रिजर्व सीटों को बढ़ाया जाता है तो ठीक है लेकिन अगर उसे घटाने की कोशिश हुई तो जोरदार आंदोलन भी लोग करेंगे.
हम परिसीमन के विरोध में नहीं हैंः भाकपा माले
वहीं भाकपा माले के नेता शुभेंदु सेन ने कहा कि हम परिसीमन के विरोध में नहीं हैं, संविधान के तहत परिसीमन होना जरूरी है, लेकिन जिस राज्य की पहचान आदिवासियत के लिए है उनका प्रतिनिधित्व विधानसभा और लोकसभा में कम नहीं होना चाहिए.
वहीं कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि पूरे देश में केंद्र सरकार अपनी गलत नीतियों के माध्यम से परिसीमन लागू कर सत्ता हथियाने की कोशिश में लगी है, लेकिन हम लोग ऐसा नहीं होने देंगे. रविवार हुई बैठक की रिपोर्ट तैयार कर पार्टी आलाकमान को सौंपी जाएगी. उसके बाद पार्टी आलाकमान आगे का निर्णय लेगी.
2 अगस्त को रांची में आदिवासी एकता रैली, राहुल गांधी और राज्यपाल से भी मुलाकात करेंगेः बंधु तिर्की
आदिवासियों के हक और अधिकार से कोई समझौता नहीं करने का हुंकार भरते हुए बंधु तिर्की ने कहा कि एक परिसीमन कमेटी का गठन किया गया है जो परिसीमन के कानूनी पहलू को देखेगी. वहीं आने वाले दिनों में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अपनी बातों से अवगत कराया जाएगा. इसके साथ-साथ 02 अगस्त 2026 को रांची के मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता महाजुटान रैली का आयोजन किया जाएगा.
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कौन आता है, कौन नहीं आता है, इस पर उनकी नजर नहीं है. उनकी नजर इस बात पर है कि असम की तरह झारखंड में भी परिसीमन के नाम पर आम आदिवासी, दलित, ओबीसी की राजनीतिक हकमारी न हो. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में वोट की लड़ाई हारने के बाद भाजपा अब षड्यंत्र रचकर झारखंड की सत्ता पाना चाहती है, लेकिन हम उसे पूरा नहीं होने देंगे.


