Saturday, July 4, 2026

रांची में झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा कार्यशाला का आयोजन किया गया.

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रांचीः जिला विधिक सेवा प्राधिकार में वित्तीय कौशल को बेहतर बनाने के उद्देश्य से झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा आज शनिवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया.

राजधानी के डोरंडा स्थित न्याय सदन के झालसा सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय-सह-कार्यकारी अध्यक्ष, झालसा, न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी, विशिष्ट अतिथि, न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय एवं गणमान्य लोगों के द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया.

इस कार्यशाला को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय-सह-कार्यकारी अध्यक्ष, झालसा ने कहा कि किसी भी संस्था की प्रगति एवं जनविश्वास का आधार उसके वित्तीय संसाधनों का पारदर्शी, जवाबदेह एवं नियमसम्मत प्रबंधन है. उन्होंने कहा कि बजट निर्माण, व्यय एवं निधियों के उपयोग में दूरदर्शिता तथा सामान्य वित्तीय नियमों का अक्षरशः पालन किया जाना आवश्यक है.

Workshop organized by Jharkhand State Legal Services Authority in Ranchi

उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिवों को संबोधित करते हुए कहा कि वे वित्तीय प्रबंधन की रीढ़ हैं तथा बजट तैयार करने, निधियों के समुचित उपयोग एवं उपयोगिता प्रमाण-पत्र समय पर उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं. उन्होंने कहा कि सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना निधियों का अन्य मद में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए तथा प्रत्येक व्यय का विधिवत अभिलेख एवं वाउचर सुरक्षित रखा जाना चाहिए.

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने पैरा लीगल वॉलंटियर्स एवं मध्यस्थों को उनके मानदेय का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि समय पर भुगतान से उनका मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक समर्पण के साथ कार्य कर सकेंगे. उन्होंने सचिवों से कार्यशाला को संवेदनात्मक बनाते हुए वित्तीय प्रबंधन से संबंधित सभी शंकाओं का विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त करने का आह्वान किया, ताकि विधिक सेवा संस्थाओं की कार्यप्रणाली और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बन सके.

न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने किया संबोधित

इस कार्यशाला को न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक धन का उपयोग करने वाले प्रत्येक विभाग एवं संस्था के लिए वित्तीय अनुशासन अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विधि शिक्षा के दौरान वित्तीय प्रबंधन एवं वित्तीय नियमों का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिल पाता, जबकि न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों के प्रभावी संचालन के लिए इनका ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव बजट निर्माण, परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा वित्तीय व्यय के प्रमुख अधिकारी होते हैं इसलिए उनके लिए वित्तीय नियमों की समुचित जानकारी आवश्यक है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को वित्तीय प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त होगी तथा विषय पर सार्थक विचार-विमर्श होगा.

इस अवसर पर उद्घाटन सत्र में झालसा न्यूजलेटर अप्रैल से जून 2026 का विमोचन किया गया एवं बिरसा कॉलेज, खूंटी के छात्रों को नालसा द्वारा उनके द्वारा तैयार किए गए रील को भारतवर्ष में सर्वोत्तम पुरस्कार प्रदान किए जाने पर सम्मानित किया गया.

इस मौके पर स्वागत संबोधन के जरिए सदस्य सचिव, झालसा कुमारी रंजना अस्थाना ने अतिथियों का स्वागत किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन अभिषेक कुमार, उप निबंधक-सह-उप सचिव, झालसा ने किया. कार्यशाला के दौरान तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जो वित्तीय प्रबंधन के विभिन्न विषयों पर केंद्रित थे, विशेष रूप से अकाउंटिंग बुक्स और रजिस्टर का रखरखाव, DLSA की संपत्तियां, PFMS मॉड्यूल और GeM, और झारखंड के DLSA के छमाही कामकाज का ब्यौरा, पर आधारित थे.

Workshop organized by Jharkhand State Legal Services Authority in Ranchi

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